# Self Book Publishing in India । Inkalab Publication । Pride of Indian Literature > Self-publishing in India | Book Publishers | Online Publishing ## Posts - [साहित्य का महत्त्व और उद्देश्य](https://inkalabpublication.com/importance-and-purpose-of-literature/): *डॉo ब्रजेश बर्णवाल का साहित्यिक परिचय* —————————————————————- इनका नाम डॉo ब्रजेश बर्णवाल है। इनका जन्म 10 जून 1993 को हुआ था। ये अशोक बर्णवाल एवं यशोदा देवी के संतान हैं। ये झारखण्ड राज्य के गिरिडीह में स्थित सिंघो गांव के निवासी हैं। लगभग पांच वर्ष की अवस्था में ही इनके पिताजी का देहावसान हो गया।बचपन से ही इनका जीवन संघर्षों और अभावों से भरा हुआ है। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा अपने ही गाँव में स्थित प्राथमिक विद्यालय से संपन्न हुई। इन्होंने ए एस महाविद्यालय सत्संग देवघर से हिंदी विषय में स्नातक, देवघर महाविद्यालय, देवघर से स्नातकोत्तर(गोल्ड मैडलिस्ट माननीय राज्यपाल श्री रमेश […] - [प्रतिभा सम्मान समारोह में "सेवा भक्ति के प्रतीक" पुस्तक का भव्य विमोचन](https://inkalabpublication.com/grand-release-of-a-book-symbolizing-service-and-devotion-at-the-pratibha-samman-ceremony/): सर्व श्री रेगरान पंचायत अजमेर एवं पट्टी पंचायत संस्था 210 गांव अजमेर द्वारा प्रति वर्ष आयोजित होने वाला वार्षिक प्रतिभा सम्मान समारोह इस वर्ष 12 अक्टूबर 2025 रविवार को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सभागार अजमेर में बड़े ही उत्साह और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर शिक्षा, प्रशासन, खेलकूद, संस्कृति एवं समाज सेवा जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले समाज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, अधिकारियों और समाजसेवकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कक्षा 10वीं और 12वीं में 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर 65 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त […] - [‘मौन संवाद’ काव्य संग्रह के रचनाकारों को ‘निराला सारस्वत सम्मान’ से नवाज़ा गया](https://inkalabpublication.com/the-authors-of-the-poetry-collection-maun-samvad-were-awarded-nirala-saraswat-samman/):   इंकलाब पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित साझा काव्य संग्रह “मौन संवाद” के संपादक एवं सभी रचनाकारों को प्रतिष्ठित “निराला सारस्वत सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा में एक गौरवपूर्ण अवसर के रूप में दर्ज हुआ। इस अवसर पर “मौन संवाद” के सभी रचनाकार — निरंजना डांगे (संपादक), देवेन्द्र थापक, मीनू अग्रवाल, दीपिका सराठे, डॉ. नीरज पखरोलवी, सोनिया दत्त पखरोलवी, महादेव मुंडा, रसाल सिंह ‘राही’, ज्योति कुमावत, अविनाश ब्यौहार, रश्मिता देवेंद्र पोटफोडे, सुनील रंजन सिंह, रेणुका आर्या, प्रीतम कुमार पाठक, मृणालिनी, अनिल कुमार घिल्डियाल, अमरनाथ त्रिवेदी, प्रदीप कुमार प्रेम, डॉ. पवन कुमार बालानिया, विजय शिंदे […] - [अजमेर के गणपत लाल उदय को मिला “अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक रत्न” मानद उपाधि सम्मान](https://inkalabpublication.com/ganpat-lal-uday-of-ajmer-received-international-teacher-ratna-honorary-degree-honor/): अजमेर, राजस्थान के प्रसिद्ध साहित्यकार और “सैनिक कवि” के नाम से विख्यात गणपत लाल उदय को नेपाल की प्रतिष्ठित संस्था “शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन, नेपाल” द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस कविता प्रतियोगिता में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए “अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक रत्न” मानद उपाधि सम्मान से अलंकृत किया गया है। लुंबिनी/नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित इस भव्य प्रतियोगिता में भारत सहित कई देशों के 2143 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपनी कविताओं के माध्यम से सहभागिता की। निर्णायक मंडल द्वारा रचनाओं के मूल्यांकन उपरांत 214 शिक्षकों को अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक रत्न सम्मान और अन्य 46 […] - [तू ही भगवान राम](https://inkalabpublication.com/you-are-lord-ram/): तू ही बालक हो , तू ही राम हो , तू ही मर्यादा हो , तू ही राम हो , शिशु रूप में तू ही हो धर्मात्मा , विष्णु रूप में तू ही रखवाला , प्रभु आपकी लीला तो अपरंपार। कोमल – सी चरणों में कृपालु हो , न्याय की तलवार भी तू ही हो , पिता रूप में ममता की गूंज हो , प्रभु आपकी लीला भी तो न्यारी , धरा पर नीति में दिव्य ज्योति हो। तू ही दशरथ पुत्र राम कहलाया , तू ही अयोध्या का राजा बना , धर्म युग का पथ – प्रदर्शक बना , […] - [आजाद हो अपना देश दोबारा](https://inkalabpublication.com/you-are-free-again/): नमन करो उस बापू को , जिन्होंने अपना देश आजाद कराया , आखिर हमें वो आजादी मिली नहीं , नव जीवन का नई आजादी हो दोबारा , आजाद हो अपना देश दोबारा । अपना देश आजाद होने का सपना , पुरा हुआ नहीं , हम हिन्दुस्तान के नागरिकों को , यदि आजाद हैं हम हिन्दुस्तानी , तो हम सबों में भेदभाव हीं क्यों , आजाद हो अपना देश दोबारा । आजाद हिन्द के हम सबों में मतभेद हीं क्यों , हम सबों में ऊंच-नीच व बड़ा – छोटा हीं क्यों , नवयुग के नवयुवकों का है यह संकल्प , कमर […] - [प्रेम की घड़ी में मिलन जो हुआ](https://inkalabpublication.com/what-happened-in-love/): प्रेम की घड़ी में मिलन जो हुआ , हर क्षण हर पल प्रेम जो हुआ , मंदिर मस्जिद में होती है मिलन , हाट – बाजार में होती है मिलन , प्रेम की मिलन में होती है आनंद । प्रेम की घड़ी में मिलन जो हुआ , प्रेम की रस में आनंद हीं आनंद , सोचा नहीं था मुझे जो प्रेम हुआ , दो दिलों का संगम प्रेम भड़ा रस , प्रेम की बंधन में आनंद हीं आनंद । प्रेम की घड़ी में मिलन जो हुआ , पारिवारिक जीवन में है जो आनंद , भाई-बहन का संबंध भी तो प्रेमरस […] - [पुस्तक समीक्षा: संवेदनाओं और जीवन-दर्शन का अनूठा संगम है-कितनी बार कहा साथी (पातियाँ प्यार की) काव्य संग्रह](https://inkalabpublication.com/book-review-is-a-unique-confluence-of-condolences-and-life-philosophy-how-many-times-said-poetry-collection-of-fellow-love/): पुस्तक: कितनी बार कहा साथी – पातियाँ प्यार की लेखक –  हरेंद्र “हमदम” दिलदारनगरी प्रकाशक – इंकलाब पब्लिकेशन मुंबई , महाराष्ट्र मूल्य : 499 रुपए (हार्डकवर)   हरेंद्र “हमदम” दिलदारनगरी का काव्य-संग्रह कितनी बार कहा साथी (पातियाँ प्यार की) प्रेम, संवेदनाओं और जीवन-दर्शन का अनूठा संगम है। यह संग्रह केवल भावनाओं का संकलन भर नहीं है, बल्कि मनुष्य के अंतरमन की गहराइयों में उतरकर वहाँ छिपे प्रेम, संवाद और संघर्ष को उजागर करता है। संग्रह का मूल स्वर प्रेम है, परंतु यहाँ प्रेम केवल स्त्री-पुरुष के बीच का आकर्षण नहीं रह जाता, यह मन और आत्मा के संवाद का प्रतीक […] - [कृष्ण का दीदार](https://inkalabpublication.com/krishnas-heart/): *डॉo ब्रजेश बर्णवाल का साहित्यिक परिचय* —————————————————————- इनका नाम डॉo ब्रजेश बर्णवाल है। इनका जन्म 10 जून 1993 को हुआ था। ये अशोक बर्णवाल एवं यशोदा देवी के संतान हैं। ये झारखण्ड राज्य के गिरिडीह में स्थित सिंघो गांव के निवासी हैं। लगभग पांच वर्ष की अवस्था में ही इनके पिताजी का देहावसान हो गया।बचपन से ही इनका जीवन संघर्षों और अभावों से भरा हुआ है। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा अपने ही गाँव में स्थित प्राथमिक विद्यालय से संपन्न हुई। इन्होंने ए एस महाविद्यालय सत्संग देवघर से हिंदी विषय में स्नातक, देवघर महाविद्यालय, देवघर से स्नातकोत्तर(गोल्ड मैडलिस्ट माननीय राज्यपाल श्री रमेश […] - [१५ अगस्त ७९वीं स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पूर्व नायब सूबेदार प्रशांत तिवारी जी का हुआ सम्मान](https://inkalabpublication.com/former-naib-subedar-prashant-tiwari-ji-honored-on-the-occasion-of-15-august-9th-independence-day/): १५ अगस्त और श्री कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ दिवस पर ‘ काव्यसृजन ’ व ‘ नवांकुर ’ परिवार के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया। यह भव्य आयोजन अंधेरी, साकीनाका में श्री राम जानकी मन्दिर के प्रांगण मे मनाया गया। काव्य गोष्ठी के साथ काव्य प्रतियोगिता का भी आयोजन रखा गया था।तिरंगा से सुसज्जित मंच, सरस्वती माता की तस्वीर व सम्मान चिन्ह से सुशोभित कोना सभी कुछ की शोभा देखते ही बन रही थी। इस सुंदर व देश भक्तिमय कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के हाथों माँ वीणा पाणी के द्वीप प्रज्ज्वलन से हुई। मंच साहित्य […] - [MERI MAA](https://inkalabpublication.com/meri-maa/): ” मेरी माँ ” मेरी माँ है सब से प्यारी | सबसे अच्छी जग में न्यारी || लोरी गाकर मुझे सुलाती | भोर हुई तो मुझे जगाती || हाथ पकड़ कर चलना सिखाया | भले बुरे का ज्ञान बताया || सबसे बड़ा यही है ज्ञान | माँ का सदा करो सम्मान || माँ की सेवा करे जो कोई | दुःख पावें वो कभी न कोई || मेरी माँ है सबसे प्यारी | सबसे अच्छी जग में न्यारी || द्वारा : मोनिका नौटियाल ( उत्तराखंड ) - [मां की सीख](https://inkalabpublication.com/mothers-learning/): लाख तानों से तेरे आत्मविश्वास को डिगाया जाएगा तुझे तेरी ही क्षमताओं पर शंका करने को उकसाया जाएगा तेरे बस का नहीं है ये हर बार तुझे समझाया जाएगा तेरे मूल्य को तेरी ही नजरों में गिराया जाएगा उस वक्त धैर्य से सब सुन नजरअंदाज करना तुम बस खुद पर ही विश्वास करना क्यूंकि मेहनत से बदलेगा जिस दिन दौर ये तुम्हारा वे सभी लोग संग नज़र आयेंगे ये जो आज पत्थर लिए खड़े हैं हाथों में कल तुम्हारे लिए फुल भी लाएंगे तुम्हारी क्षमताओं के आगे एक दिन खुद ही झुक जाएंगे बस आत्मविश्वास को कभी टूटने मत देना […] - [बैरी चांद](https://inkalabpublication.com/barry-moon/): मैं मेरी जिंदगी से प्रिया को भुला चुका था। शायद मैंने उसको अपने जीवन का एक सपना मान लिया था सोचा था कि सपने तो सपने होते हैं। मैं अपने जीवन मे प्रिया की कमी महसूस तो करता था, पर अब मैं कुछ नहीं कर सकता था।क्योंकि प्रिया की शादी हो चुकी थी और अब मैं उसकी जिंदगी में कांटा नहीं बनना चाहता था क्योंकि वह मेरे लिए मेरे प्राण के समान थी। प्रिया मेरी कॉलेज में पढ़ने वाली एक सुंदर और हंसमुख लड़की थी। वह कक्षा में हर कार्य को तल्लीनता से करती थी और हर किसी के लिए […] - [लघुकथा :_खोपड़ियों से वार्तालाप कल्पनाओं में सत्य की एक झलक](https://inkalabpublication.com/short-story-2/): लघुकथा:_खोपड़ियों💀 से वार्तालाप🙀 कल्पनाओं की दुनिया में सत्य की एक झलक अचानक से तेज हसीं की और कोलाहल की आवाज कानों में पड़ी थोड़ी डरावनी सी आहट के साथ इसे सुन कर मैं कांप गई क्या था कुछ समझ नहीं आया कि तभी अचानक असंख्य मानव खोपड़ियों ने मुझे घेर लिया और घूमने लगी मेरे चारों तरफ अर्द्ध रात्रि का समय था और ये डरावना सा दृश्य मेरी सांसे उखड़ रही थी भीषण ठंड में पसीने की बूंदे जलधारा सी माथे से बह रही थी मैने घबरा कर आंखे बंद कर ली सोच कर कि मेरा डर मेरा वहम है […] - [अफसोस](https://inkalabpublication.com/alas/): अफसोस दिसम्बर का महीना था, अगहन मास था। सर्द हवाएं बह रही थी। शेखर आफीस के किसी काम से झारखण्ड के छोटे शहर में गया था। वैसे तो झारखण्ड का पहाड़ी इलाकों में सालों भर सर्दी लगती थी। अब तो वहां के मौसम में भी प्रदूषण के वजह से प्राकृतिक सौंदर्य को आघात पहुंचा है और मौसम में काफी बदलाव आ गया है। शेखर जहां गया था वहां छोटी जगह के वजह से सुविधा की कमी थी। शेखर को वापसी के लिए देर रात तीन बजे की ट्रेन थी। परंतु रात में वहां सात आठ बजे के बाद स्टेशन के […] - [गुरुपूर्णिमा](https://inkalabpublication.com/gurpurnima/): माँ 🙏 तू माता मै लाल तेरी तू अस्तित्व मै परछाई तेरी गर्भ में सीखी मैने गाथा सीखी रामायण और कृष्ण की बाल लीला नमन करु मै माँ तुम्हे तुम ही हो पहली गुरु पिताजी 🙏 तुम मेरी छत ,तुम ही हो ढाल मेरी तुम मुझमें बसा पराक्रम ,तुम ही हो दृढ़ निश्चय मेरा तुम हो सीख अच्छे बुरे की,तुम ही हो पथ प्रदर्शक नमन करु मेरे जन्मदाता पालन हार तुम्हे मै तुम हो मेरे दूजे गुरु परिवार और समाज 🙏 दादा दादी की गोद वो प्यारी जिसमें बैठ सुनी कहानी उस कहानी में शामिल थी दुनियादारी और शिक्षा जीवन […] - [मैं झुकी थी - इसलिए उठ सकी](https://inkalabpublication.com/i-was-bent-so-i-got-up/): आइये , सुनते है मनस्तगिति एक स्त्री की , अपने स्वर में कहती रची हुई एक गाथा की , अपने संघर्ष, अपनी अनुभूति और शक्ति को पाने की, यह यात्रा खुद सुनाती है — शांत, दृढ़, और आत्मस्वीकृत स्वभाव में लक्ष्य पास जाने की । यह कविता उस स्त्री की आवाज़ है — जिसने रास्तों को आसान नहीं पाया, लेकिन झुकी नहीं ..थकी नहीं…रुकी नहीं .. और अंततः विनम्रता से शक्ति को छू लिया — “मैं झुकी थी — इसलिए उठ सकी” (एक स्त्री की आत्मकथा में ढली कविता) मैं भी दौड़ी थी — उन ऊँचाइयों की ओर, जहाँ नाम […] - [शिव की कलम से](https://inkalabpublication.com/from-the-pen-of-shiva/): _तुम मत बदलना मेरे लिए_ कुछ- कुछ तुम वैसी ही हो जैसे ढलती शाम में आकाश में उमड़ते बादल कुछ स्याह कुछ रक्तिमा कुछ कुछ नीली पीली धूप लिए. कुछ कुछ तुम वैसी ही हो जैसे मक्खन कुछ घी कुछ पिघला मोम बस अब तक नहीं जान पाया एक क्राइटेरिया में तुमको फिट करना. जब जब लगता है तुम ऐसी ही हो बदला मिलता है अगले ही पल तुम्हारा रूप- प्रतिरूप, भाव विचार व्यवहार कह नहीं सकता तुम कैसी हो. कुछ कुछ तुम वैसी ही हो जैसे संगीत की ध्वनि सा रे गा मा पा पर नहीं पता होता मुझको […] - [किरदार](https://inkalabpublication.com/character/): डालकर अपने किरदार पर पर्दा लोग कहते हैं जमाना खराब है लिवाज बदल लेने से किरदार नहीं बदलते ऐसे लोगों के किरदार की मेरे पास भी खुली किताब है हम रखते हैं पाक साफ दिल अपना और लोग यहां खबरदार नजर आते हैं ऐ खुदा जब भी मिलूं तुझसे मिलूं लोगों से मिलता हूं तो कई किरदार नजर आते हैं बड़ा मुश्किल हो गया पहचान अपने परायों का करना अब यहां अपने भी करते व्यापार नजर आते हैं कभी एक पलड़े में रहकर न बोलने वाले ऐसे लोग आस्तीन के सांप नजर आते हैं जिसके किरदार में हो शुरू से […] - [किसी से तो शिकायत कर रहा है वो](https://inkalabpublication.com/he-is-complaining-to-someone/): ग़ज़ल.. किसी से तो  शिकायत   कर  रहा  है  वो मग़र  खुद  से   मुहब्बत  कर  रहा  है  वो नहीं उसको गिला शिकवा  किसी से अब ख़ुदा  की  अब   इबादत  कर  रहा  है वो दुआयें  चल रही  हैं  साथ  जब तक  यह ज़माने   से   बगावत    कर   रहा   है  वो सिवा   उसके   नहीं   आदत   हमें   कोई ख़ुदा  बन  कर   इनायत  कर  रहा  है वो खमोशी   रास   आती   थी   जिसे  ‘राही’ सभी  से  अब  रफ़ाक़त  कर  रहा  है  वो ~ रसाल सिंह ‘राही’ - [सच्ची सुंदरता](https://inkalabpublication.com/true-beauty/): लघुकथा सच्ची सुंदरता वो झुर्रियों भरी काया आज उदास बैठी थी कंपकपाते हाथों के साथ खुद को दर्पण में देख व्याकुल हो रही थी दर्पण यथार्थ को उजागर कर रहा था और चिढ़ाते हुए काया से बोला :_बोल मेरी सुंदरी आज नहीं इठलाएगी,आज नहीं खुद को निहार निहार कर घमंड के सागर में डुबकी लगाएगी,आज अहम का श्रृंगार नहीं करेगी ,कहा है वो काजल के बादल में मिला गुरूर,कहा है वो गोरी दमकती सूरत में बहता अहंकार,कहा है जुल्फों संग इठलाता अभिमान,मुझे आज उससे नहीं मिलाएगी दर्पण के शब्द काया को उसके कृत्य गिना रहे थे ,कैसे इस सुंदर काया […] - [तख्ती से टैबलेट तक](https://inkalabpublication.com/from-the-table-to-the-tablet/): 🖋️ तख्ती से टैबलेट तक तख्ती से टैबलेट तक की ये कहानी, कभी हँसी, कभी अश्रु की निशानी। कक्षा की धूल से स्मार्ट स्क्रीन तक, शिक्षक की बदलती पहचान की रवानी। कभी चौक से उड़ता था ज्ञान, अब क्लिक पे खुलते हैं ज्ञान-विधान। पर बच्चों की आँखों से दूर हुआ मन, संस्कार कहाँ हैं — ये उठता है प्रश्न। सरकारी स्कूलों से मोहभंग सा क्यों? शायद दिखावे में छिप गया ‘गुरु’ का योग। सम्मान की बातें अब पुस्तकों में हैं, मंचों पे भाषण, पर मन उदास से हैं। वो अभिभावक जो गुरु को भगवान कहते थे, आज शिकायतों में दिन-रात […] - [दुख का व्यापार](https://inkalabpublication.com/misery-business/): दुख का व्यापार सोशल मीडिया का हर तरफ इस तरह प्रभाव छा रहा की इंसान अपना दुख भी बेचता नजर आ रहा कभी खुद को रोते बता रहे कभी मां बाप के आंसू दिखा रहे छुपाया करते थे जिन चीज़ों को उनको खुलेआम जता रहे लाइक्स….व्यूज बढाने के लिए कुछ भी कंटेंट बना रहे अपने घर के झगड़ों को खुलेआम पब्लिक में ला रहे दुख के खरीददार वो हैं जिनसे कोई भी रिश्ता नहीं जो सहानुभूति दे रहे हैं उस दुख से उनका वास्ता नही समझ नहीं आता की कैसे भावनाओं का ऐसा अंत हुआ इंसानियत का इतना पतन हुआ […] - [आलेख बालिका शिक्षा-पी.यादव 'ओज'](https://inkalabpublication.com/article-girls-education-p-yadav-oz/): शिक्षा’ जिसके माध्यम से मनुष्य यह जान पाता है कि जीवन में उसके होने का महत्व क्या है।जन्म का उद्देश्य क्या है।उसके स्वयं की,परिवार,समाज,देश और विश्व के प्रति उसकी जिम्मेदारियां क्या है?’शिक्षा’ जहां मनुष्य को आत्म-विकास से लबरेज करती है।वहीं स्वालंबन एवं श्रेष्ठ जीवन की ओर प्रेरित भी करती है।’शिक्षा’ हर मनुष्य को चरित्र संपन्न,विचारवान और स्वयं की श्रेष्ठता को साबित करने हेतु प्रेरणा देती है।शिक्षा के अभाव में मनुष्य का जीवन उस पशु की तरह हो जाता है,जहां वह भ्रम में है कि वह स्वयं जीवन-यापन कर रहा।इसीलिए समाज में सभी का शिक्षित होना अत्यंत ही आवश्यक है।उसमें भी […] - [तिरंगा](https://inkalabpublication.com/tricolor/): 78 वां स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए , मैंने अपनी ओर से विशेष रूप से तिरंगा पर देशभक्ति रचना की है । तिरंगा हीं मेरी आन है , तिरंगा हीं मेरी शान है तिरंगा हीं मेरी जान हैं ।। जिन्दगी से हार कर भी , हम जीत जाते हैं , वो कफन जब उनका तू बन जाते हो । तिरंगा हीं मेरी आन है , तिरंगा हीं मेरी शान है , तिरंगा हीं मेरी जान हैं ।। तिरंगा की पहचान है तीन रंगों की , केसरिया , सफेद और हरा , सफेद रंग में शोभती है नीले रंग की अशोक […] - [कर भला तो हो भला](https://inkalabpublication.com/a-good-deed-always-comes-around/): एक प्रसिद्ध राजा था । जिसका नाम रामपाल था । अपने नाम की ही तरह प्रजा की सेवा हीं उनका धर्म था । उनकी प्रजा भी उन्हें राजा रामपाल की तरह हीं पूजती थी । राजा रामपाल सभी की निष्काम भाव से सहायता करते थे । फिर चाहे वो उनके राज्य की प्रजा हो या अन्य किसी राज्य की उनकी ख्याति सर्वत्रथी उनके दानी स्वभाव और व्यवहार के गुणगान उनके शत्रु राजा तक करते थे । उन राजाओं में एक राजा था जिसका नाम महिपाल सिंह , जिसे राजा रामपाल की इस ख्याति से ईर्ष्या थी । उस ईर्ष्या के […] - [दिलों से आग नफ़रत की बुझाओ तुम](https://inkalabpublication.com/you-extinguish-the-fire-from-the-heart/): ग़ज़ल… दिलों से आग नफ़रत की बुझाओ तुम मग़र इन फ़ासलों को भी मिटाओ तुम नहीं अल्फ़ाज़ कोई मिल रहा मुझको लिखूं मैं क्या यहां कुछ तो बताओ तुम मुहब्बत इश्क़ की ना बात करना तुम कभी जब दास्तां दिल की सुनाओ तुम मुसाफ़िर हैं सभी अनजान राहों के किसी से भी नहीं यह दिल लगाओ तुम खतायें सब भुला देंगे तुम्हारी हम ख़ता कोई हमारी इक बताओ तुम दिलों का खेल अच्छा खेलते हैं जो कभी भी पास उनको ना बिठाओ तुम ख़ुदा अपना जिसे भी मानते हो तुम कभी एहसास उनको यह दिलाओ तुम - [ग़र टूटा दिल, तन्हाई संग होता यहाँ..](https://inkalabpublication.com/gar-broke-heart-would-be-with-loneliness-here/):  ग़र टूटा दिल, तन्हाई संग होता यहाँ.. ग़र टूटता जब तारा आसमां में, उसे देख मन्नत मांगते हैं यहाँ सभी, न जानें  टूटे हुए दिल को देख, है क्यूं हसीं यहां उड़ाते यारों  सभी!   टूटे दिल की चीखें हैं कौन सुने, हर चेहरा मुस्कुराता है दिखता यहाँ! अंदर की दरारें हैं दिखती नहीं, बस ज़ख्मों पे नमक है डालते यहाँ! है रोया चुपके से कोने में कोई, तो कहते हैं उसे “कमज़ोर” है यहाँ! दर्द दिखाना है गुनाह बन गया, दुनिया है पत्थर दिल बन गया यहाँ! था वह भी एक आसमान कभी, जिसमें है ख्वाबों के तारे चमके यारों, अब राख […] - [ अच्छा हुआ तुमने मुझसे, अब किनारा कर लिया....](https://inkalabpublication.com/%e0%a4%85%e0%a4%9a%e0%a5%8d%e0%a4%9b%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%86-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%ac/): अच्छा हुआ तुमने मुझसे, अब किनारा कर लिया, था अपना कभी बनाया, है अब बेगाना कर दिया। टूटे अरमानों की चुभन सीने में बसती है अब मेरे, हर साँस यादों की परछाई से, था ऐसा भर दिया! अच्छा हुआ तुमने मुझसे, अब किनारा कर लिया,   जो ख्वाब हमनें साथ बुने थे रेशम से कोमल सी, काँटों से भरी जिंदगी, आँखें हैं बोझल कर दिया! अच्छा हुआ तुमने मुझसे, अब किनारा कर लिया, है तेरे बिना ये चाँदनी भी सूनी लगती थी मुझको, दिल की मेरे धड़कनों को, बस अधूरा छोड़ दिया! अच्छा हुआ तुमने मुझसे, अब किनारा कर लिया, […] - [वरना इतनी अच्छी सी किस्मत मेरी कहां हो.](https://inkalabpublication.com/otherwise-where-are-my-luck/): वरना इतनी अच्छी सी किस्मत मेरी कहां हो… तेरे झील सी आँखों में मेरी हो दुनियां समाया,                माथे पर लगा सिंदूर मेरे प्यार की निशानी हो! तेरी मुस्कान जैसे सुबह की पहली हो किरण,               हर अंधेरे को चीरती, रौशनी का वो दर्पण हो,! तेरी आँखें लगे जैसे समंदर की सी हो गहराई,                हर राज़ छुपाए वो तेरे रसीले गुलाबी होंठ हो! तेरी बातें  है लगती जैसे बहारों का हो तराना,                हर लफ़्ज़ में होता मीठा सा कोई फसाना हो! तेरा चेहरा जैसे फूलों की रूहानी सी हो रेखा,                जो देख खुदा सोचे, क्या खूब मेरी रचना  हो! तेरी चाल हिरण सी और […] - [‘वी वॉक आफ एम्पावरमेंट’ की प्रस्तुति में ओपन माइक का शानदार आयोजन](https://inkalabpublication.com/open-mic-in-the-presentation-of-we-walk-of-empowerment/): मुंबई। 25 मई को गोरगांव पश्चिम स्थित ‘रासा द स्टेज’ में रविवार की शाम एक बेहद खूबसूरत और यादगार ओपन माइक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन ‘वी वॉक आफ एम्पावरमेंट’ संस्था द्वारा किया गया, जिसकी संस्थापक और मुख्य आयोजक नसरीन मलिक हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य उभरते कलाकारों को मंच देना और उनके आत्मविश्वास को निखारना था। यह सांस्कृतिक संध्या शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक चली, जिसमें देशभर से आए कवि, गायक, शायर, कॉमेडियन और लेखक जैसे विभिन्न विधाओं के कलाकारों ने भाग लिया और अपने हुनर से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम […] - [ऑपरेशन सिंदूर – जब राष्ट्र पहले है, राजनीति बाद में होनी चाहिए](https://inkalabpublication.com/operation-sindoor-when-the-nation-is-first-politics-should-be-later/): भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष के दौरान भारत सरकार द्वारा चलाया गया “ऑपरेशन सिंदूर” सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश था — “भारत अब चुप नहीं बैठेगा”।जहां एक ओर हमारी सेना सीमा पर बहादुरी से लड़ रही थी, वहीं भारत सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, दुनिया को यह दिखा रही थी कि भारत अब कमजोर नेतृत्व वाला देश नहीं रहा — अब यहां निर्णय लेने वाला नेतृत्व है।याद रखिए – निंदा और मौन से देश नहीं चलता।आज जो लोग मोदी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, शायद उन्हें वो दौर याद नहीं […] - [मुश्किलों से भरी है जीवन,दिखती किरणें हैं उम्मीदों से भरी](https://inkalabpublication.com/life-is-full-of-difficulties-the-rays-are-full-of-expectations/): है आंसुओं की सैलाब,मेरे इन आँखों में छिपी हुईं, पर साथ उसके, उम्मीद भरी किरण भी छुपी हुई! इरादे बादलों से परे,और निकलेंगी किरणें सुनहरी, जीवन के इन्हीं मुश्किलों में, सीख होती छुपी हुई! पल पल पग पग होगी सफ़र, यूँ कांटों से भरी हुई, कर कोशिश बढ़ा जो भी,सपने उसके साकार हुई! उठ चलो मंज़िल की ओर,बढ़ो संग- संग मिलकर, जिंदगी है सफ़र,जो है मिलकर चला, आसान हुई! है मुश्किलों से भरी जीवन, सब की यहाँ “प्रताप”, कर हौसला जो है बढ़ा,जीवन उसकी आसान हुई! डॉ.सूर्य प्रताप राव रेपल्ली - [बाज़ार](https://inkalabpublication.com/market/): बाज़ार हमें खरीदता है या हम बाज़ार को! राहगीर भी भटकने लगे चकाचौंध को देख कर अब आदमी की नीलामी होती है बेधड़क जिस्म भी चंद पैसों में बिकने लगे हैं बाज़ार भी आदमी की देन है फिर आदमी ही आदमी को बेचने लगे गाँव को मिटा कर शहर में तब्दील किया अब घरों को उजाड़ कर रिश्तों के कोठे बनने लगे हैं बिन पिये राह जाता नहीं अब शामे दस्तकें होने लगी आदमी अब आदमी न रहा बाज़ार के शो केस बनने लगे गुम गई खुशियाँ घरों से अब पैसों से रिश्ते बढ़ने लगे गुमनाम हो गई जिन्दगी अब […] - [है पीकर भी न बहके यारों,उसके लिए ये संसार नहीं](https://inkalabpublication.com/even-after-drinking-it-it-is-not-a-world-for-him/): है पीकर भी न बहके यारों, उसके लिए ये संसार नहीं… हृदय नहीं पत्थर दिल है,जिसको मदिरा से प्यार नहीं, है पीकर भी न बहके यारों,उसके ये लिए संसार नहीं! हो ग़म किसी के जाने का,है साथ तेरे बोतल ही सही, कभी हाथ हो माशूका का,कभी हाथ बोतल ही सही! कोई जो पूछे तुमसे, हर दिन किसके साथ गुजर रही, कह दो कोई नहीं अपना,एक ग्लास,एक बोतल सही! नहीं कोई जल्दी पीने की,न होंठ है तरस रहे पीने को, जीवन यूँ चलता रहे, कभी देशी, कभी बीयर ही सही! जाम को दोष देते रहते हैं वो, उसको बदनाम कर रहे, नशा […] - [हो इजहारे दिल की बात,आंखों ही आंखों में हम करें...](https://inkalabpublication.com/ho-ejye-dil-kitte-dilis-in-the-eyes/): हो इजहारे दिल की बात,आंखों ही आंखों में हम करें… है ख्वाहिश चलें बाग़ में,डाल बाहों में बांह डालकर के, कुछ सफ़र ही सही, साथ चलें हम होकर एक दूजे के! हो चंद बातें ही सही प्यार की, साथ गुजार कर तुमसे, हो इजहारे दिल की बात,आंखों ही आंखों में हम करें! कुछ यूँ झील सी आँखों से,इस दिल की बात हो जाए, सुबह से शाम कब हुई न ख़बर हो, फ़िर रात हो जाए! न हो कोई फिक्र जहां की, न कोई शिकवा ज़माने से, हो हमसफ़र मेरी फ़िर डर क्या,बादलों या तूफानों से! हो चाय की दो प्यालियाँ, […] - [बन मिसाल लोगों की,फ़िर दुनिया छोड़ने की सोच.](https://inkalabpublication.com/bane-bane-people-think-of-leaving-the-world/): बन मिसाल लोगों की,फ़िर दुनिया छोड़ने की सोच. खुला हुआ नीला आसमां,ऊँची उड़ान भरने की सोच, है अंधेरा हर तरफ़,दूर तक रौशनी बिखेरनी की सोच! तेरे नज़रों से झलक रही, उम्मीदों से भरी हुई किरणें, उन बुलंदियों तक पहुँच, नीले आसमां छूने की सोच! नित नए अरमान,रंगीन सपनों को दिखा रही दुनिया, है चमचमाती चाँद को, ज़मीं पर ला रखने की सोच! मोहब्बत और खूबसूरती से, भरी हुई ये दुनियां यारों, किसी के दिल में, अपने लिए जगह बनाने की सोच! ले हिम्मत की रौशनी, बढ़ आगे सच्चाई की राह पर, हर दर्द को समेटे हर चोट को सहते, बढ़ने […] - [ हो ग़र आखरी सांस मेरी,बस सांस रुके तेरी बाहों में.](https://inkalabpublication.com/%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%96%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ac%e0%a4%b8-%e0%a4%b8/):  हो ग़र आखरी सांस मेरी,बस सांस रुके तेरी बाहों में. है ख्वाहिश चलें बाग़ में,डाल हाथ में हाथ एक दूजे के, मान इसे सफ़र,संग कुछ कदम चलो हमसफ़र बन के! हो चंद बातें ही सही प्यार की,संग संग रह कर तुम्हारे, हो इजहारे दिल की बात,यूँ आंखों ही आंखों में हमारे! कुछ यूँ झील सी आँखों से,इस दिल की बात हो जाए, सुबह से शाम कब हुई न ख़बर हो, फ़िर रात हो जाए! न हो कोई फिक्र ज़हां की, न कोई शिकवा ज़माने से, हो हमसफ़र मेरी फ़िर डर क्या,बादलों या तूफानों से! ले चाय की चुस्कियाँ,करें पूरे ख़्वाब जो […] - [माॅ](https://inkalabpublication.com/maa/): माँ का रूप – राम और कृष्ण की जननी माँ तू साक्षात् करुणा की मूरत, तेरे आँचल में बसी है सृष्टि की सूरत। जैसे यशोदा ने कृष्ण को झूला झुलाया, वैसे ही तूने हर दुःख को मुस्कुरा कर भुलाया। तेरे बिना राम वनवास भीअधूरा, कौशल्या के आँचल ने दिया था धैर्य का साथ पूरा। जन्म दिया तूने प्रभु को भी, यह तेरा ही मान, मातृत्व के आगे झुके सारा ब्रह्मांड और जहान। यशोदा की ममता में कृष्ण ने ली बाँसुरी की तान, तेरे स्पर्श से खिलती है हर संतान। तेरी गोदी ही प्रथम पाठशाला बनी, जिसमें राम-कृष्ण जैसी विभूतियाँ पली। […] - [भोर का सूरज](https://inkalabpublication.com/dawn/): भोर का सूरज मुझे पुकारे दूर हो जा ये रात के अंधियारे बहुत हुई ये तानाशाही अब ना चलेगी तेरी मनमानी मै संघर्ष पथ बढ़ चुकी हु तूफानों से टकराना सीख चुकी हु आते जाते है साएं ये गम के मै इनसे उभरना सीख चुकी हु भोर का सूरज मुझे पुकारे दूर हो जा ये रात के अंधियारे पिंजरा बेबसी का अब कमजोर हुआ है तोड़ कर पंछी अब आजाद हुआ है नहीं कोई बेड़ियां अब बांध पाएगी पंछी पंख मजबूत कर चुका है भोर का सूरज मुझे पुकारे दूर हो जा ये रात के अंधियारे मरुस्थल से गुजर गुजर […] - [नया मोड़](https://inkalabpublication.com/new-twist/): *नया मोड़* —————————- मन में नयी आगाज़ हुई नए भावों का आगमन हुआ सुसंस्कृत शब्दों का गठजोड़ हुआ पंकील विचारों का परिष्कार हुआ व्यवहार में चरित्र का वास हुआ बुद्धि में विवेक का समन्वय हुआ उदासीनता से रागात्मक वृत्ति हुई कोलाहल में शंखनाद हुआ जड़ता से चेतन हुआ पूर्णिमा दीदी का सान्निध्य मिला तो कविता को नया मोड़ मिला चारित्रिक गुणों का सहयोग मिला लेखनी को नयी राह मिली विसंगतियाँ दूर हुई मन में नयी आगाज़ हुई… नव चेतना का विकास हुआ.. – डॉo ब्रजेश बर्णवाल सरस्वती शिशु मंदिर उच्च विद्यालय, सरायकेला - [माँ भारती की पुकार](https://inkalabpublication.com/call-of-mother-bharati/): फिर बजी है रणभेरी, हाथों में ले लो तलवार दुश्मन की सीमा में घुसके करना होगा संहार सरहद के कोने कोने, देशप्रेम का भाव जगाएं भले शहीद होके भी मरघटों का शृंगार बन जाएं संकट के बादल छाए, समर की बेला मतवाली शोणित का उबाल देखो, आँखों में छाई है लाली पाक के नापाक इरादे, पल में नेस्तनाबूद करेंगे पृथ्वी, ब्रह्मोस और नाग, भारत को मजबूत करेंगे केवल शांति के पुजारी नहीं, रुद्र के भी अवतार हैं निखिल जगत् ने भी देखे, राफेल के कठोर प्रहार हैं प्रलयंकारी बनकर भी माटी का मोल चुकाना है कालकूट पीके भी अब मृत्यु […] - [मोदी और जोगी](https://inkalabpublication.com/modi-and-jogi/): मोदी जी को लहर समझो जोगी जी को कहर बिन मतलब की कोई वो बात नहीं करते जो समझा मोदी जी को जो समझा जोगी जो को वो सब कुछ समझ गया मोदी जी जोगी जी पर हम सब हिंदुस्तानियों को गर्व है मोदी जी हमारे त्योहार हैं जोगी जी हमारे पर्व है एक दूजे बिन दोनों अधूरे दोनों बिन देश अधूरा भारत की अब शान है मोदी भारत की पहचान है जोगी हम सब प्रजा हैं उनको तो भगवान है मोदी आये कोई मुश्किल तो प्रधान है जोगी मोदी जब भी बने कमान जोगी जी बने तीर न दौलत […] - [माँ का आंचल छोड़ कर युद्ध भूमि में उतरे हैं](https://inkalabpublication.com/leaving-the-mothers-zonal-and-landed-in-the-battlefield/): माँ का आंचल छोड़ कर युद्ध भूमि में उतरे है है जाबाज सिपाही देश के देश पे कुर्बान होने निकले है राखी,सिंदूर, कंधा, और नन्ही नन्ही उंगलियां छोड़ गांव की गालियां निकले है है बुलावा भारत माता का कहकर देश की शान में निकले हैं माँ का आंचल छोड़ कर युद्ध भूमि में उतरे हैं …….. घर की दहलीज नजरे उतारे कंधा कहे मै साथ हु भाई सर का साया गर्व से कहता तू जा बन कहर दुश्मन से लड़ना मां का आंचल छोड़ कर युद्ध भूमि में उतरे है….. राखी कहती विजय हो भाई जा राखी की बहनों के […] - [सिन्दूर (ऑपरेशन सिंदूर)](https://inkalabpublication.com/vermilion-operation-vermilion/): चुटकी भर सिन्दूर की, मांग बड़ी है आज। ऑपरेशन सिन्दूर से , बची हमारी लाज।। शौर्य हमारे सैनिकों का, देख रहा संसार I नेतृत्व हमारा है सबल,कूच-कूच अब मार I चुटकी भर सिन्दूर की ,कीमत दिया बताय। सिंह बना गीदड़ सुनो, घुसा मांद में जाय।। इस पीले सिन्दूर की, महिमा बड़ी अपार। खींच पती को लाती है , यमराजन के हाथ।। इस सिन्दूर की शक्ति अब, देख रहा संसार। रहा प्रतीक्षित युद्ध जो , हुआ आर या पार।। है सिन्दूर श्रृंगार नहि , बना आज है काल। धूल – धूसरित हो रहे, जो रहे बजाते गाल।। दर्प बना सिन्दूर है, […] - [ऑपरेशन सिंदूर](https://inkalabpublication.com/operation-vermilion/): आज लहूं देश का खोल रहा पहलगाम की घटना से, अब ना रुकेंगे घुसकर मारेंगें तेरे ही घर हथियारों से। काटेंगे और कुचलेंगें अब तुझको हम अपनें पाॅंवो से, ऐसा ताबीज़ कर देंगे बचके रहना हम पहरेदारों से।। कर देंगे अब ध्वस्त ठिकाने हिजबुल जैश लश्करों के, ऑपरेशन सिंदूर चलाकर देंगे ज़वाब तुम हत्यारों के। लेगा अब प्रतिशोध भारत तुम पाकिस्तानी ग़द्दारों से, ईंटों का ज़वाब पत्थर से देंगे तुम जैसे मक्कारों के।। अब बचा नही सकता कोई देश तुम जैसे शैतानों को, रक्त की नदियां बहा देंगे उजाड़ देंगे तुम्हारे अड्डों को। प्रतिउत्तर बिगुल बज गया मिल गया फरमान […] - [तेरे बिना तो माँ, अधूरा ये जहाँ है…](https://inkalabpublication.com/without-you-mother-is-incomplete/): तेरे बिना तो माँ, अधूरा ये जहाँ है… माँ, तेरी यादों में बस जाऊँ , माँ, तेरी ऑचल में छिप जाऊँ… है पुकारती तेरी यादें मुझे इस कदर, हूँ डूब जाती, तेरी बातों में अक्सर मैं माँ, तू ही बरकत, तू ही मन्नत, तू ही मेरी दुआ है, तेरे बिना तो माँ, अधूरा ये जहाँ है… माँ…ये कोई रिश्ता नही.. ये एक एहसास है, जो है मेरी हर साँस में,,,, यह प्यार अजीब नही, है बस थोड़ा अनोखा माँ. हो भी कैसे न माँ, मैने तुम्हें माँ कह पुकारा है… तू जान है, तू पहचान है मेरी, तू हर राह […] - [   झील-सी आँखों में तेरे, डूबकर खो जाऊँ मैं](https://inkalabpublication.com/%e0%a4%9d%e0%a5%80%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%a1%e0%a5%82/): झील-सी आँखों में तेरे, डूबकर खो जाऊँ मैं, हर घड़ी तुझको ही सोचूँ, ख़ुद से भी खो जाऊँ मैं! तेरे लब हँसते मिलें तो दिल मेरा खिलने लगे, तू जो ख़ामोशी से बोले, दर्द भी सह जाऊँ मैं। तेरे केशों की घटाएँ जब भी बिखरें सामने, बादलों को ओढ़ कर फिर, चाँद-सा दिख जाऊँ मैं। तेरी आँखों का जो जल है, रूह तक बहता रहे, झील में बनकर किनारा, देर तक बह जाऊँ मैं। तेरे संग हर पल मेरा एक नई दुनिया बने, तू जो माँगे साथ दिल का, जान भी दे जाऊँ मैं। इस मोहब्बत की ग़ज़ल को तू […] - [हमला किया पहले पाकिस्तान पहलगाम में](https://inkalabpublication.com/attack-first-in-pakistan-pahalgam/): हमला किया पहले पाकिस्तान ने पहलगाम में , 5 सशस्त्र आतंकियों ने 26 टूरिस्टों को मारे गए , तब भारत ने जवाब दिया ‘ऑपरेशन सिन्दूर ‘ से , ‘ऑपरेशन सिन्दूर ‘ द्वारा पाक के नौ आतंक के , ठिकानों का भारत ने किया मटियामेट , फिर भी पाकिस्तान का अकर खत्म हुआ नहीं , हमला किया पहले पाकिस्तान ने पहलगाम में । 22 अप्रैल को हमला किया पाक ने पहलगाम में , और मार दिया निहत्थे टूरिस्ट को , समय व दिमाग से भारत भी दिया है जवाब , भारत सरकार ने अपने फौजियों को दिया , विशेषाधिकार आतंकिस्तान को […] - [अभी तो आगाज हुआ है](https://inkalabpublication.com/has-just-started/): ऑपरेशन सिंदूर अभी तो शंखनाद हुआ है युद्ध अभी बाकी है अभी धरा स्वरूप सिंदूरी सिंदूर का लिया प्रतिशोध ही अभी तो राम भक्त की सेना से बस पहुंचे हनुमान ही तो ध्वस्त कर दिए तुम्हारे सारे नापाक इरादे ,ठिकाने और साए आतंक के तो सुन लो ये पाक वालो जो निकल पड़े रामभक्त और पूरी देश सेना साथ में तो क्या होगा हाल तुम्हारा ना नाम भी आएगा नजर फिर नक्शे में पाक का सेना ने धरा रूप प्रचण्ड जैसे शिव ने खोला तीसरा नेत्र अब ना बच पाएंगे नापाक इरादे ना बच पाएंगे इसको जन्म देने वाले देखो […] - [तेरी ऑचल में छिप जाऊं मां,](https://inkalabpublication.com/mother-should-hide-in-your-oil/):   तेरी यादों में बस जाऊं, तेरी ऑचल में छिप जाऊं मां, हूँ पुकारती तुझको, तेरे यादों में ही खो जाती हूँ मै मां! हां तेरी बातों यादों में ही खो जाती हूँ मै मां……   तू ही बरकत, तू ही मन्नत, है तेरे बिना अधूरा जहाॅ हैं, ये कोई रिश्ता,एहसास ही नहीं,मेरी हर सांस में मां है! प्यार रहा अपने दिलों में,अनोखी सी अपनी पहेली है, हो भी कैसे न मेरी मां, हर पल दिल से मैनें पुकारा है!   तू जान है,पहचान भी मेरी,हर राह में नई सोच भी है, होगा सपना साकार आपका,हर पल तुम्हारा साथ है! […] - [ऑपरेशन सिन्दूर ।operation sindoor](https://inkalabpublication.com/operation-sindoor-operation-sindoor/):   हिन्दोस्तान  की  ताकत  है ऑपरेशन सिन्दूर जिसने   दुश्मन   के  इरादे  कर   दिये  हैं चूर पूछ   रहा  दहशतगर्दो   से  ऑपरेशन सिन्दूर कौन   पहुँचा  है   जन्नत   किसको  मिली हुर   भारत  का   यह  भरतीय   ऑपरेशन  सिन्दूर गुटने टेकने के लिए  कर देगा उनको मजबूर पहलगाम का बदला ले रहा ऑपरेशन सिन्दूर अपनो  को जब अपनो से किया था तुमने दूर   हाल बेहाल कर गया उनका ऑपरेशन सिन्दूर उड़ गए  होश  उनके  उड़  गया  चेहरे  का नूर लहू से रंगी धरती को इंसाफ दिला रहा सिन्दूर उन बेगुनाहों की बद्दुआएं लगेगी उनको जरूर   जय हिंद जय भारत जय हो ऑपरेशन सिन्दूर हुआ है ऑपरेशन  सिन्दूर हर तरफ ही मशहूर   ~ रसाल सिंह ‘राही’ - [  है बस चल पड़ते सभी, मंज़िल की सभी को तलाश है....](https://inkalabpublication.com/%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ac%e0%a4%b8-%e0%a4%9a%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%bf%e0%a4%b2/):   हैं चारों तरफ घिरे पानी से, सबको पानी की तलाश है, है ज़िन्दगी, फिर भी ज़िन्दगी में ज़िन्दगी की तलाश है! अथाह सागर सी गहराई देखी, जीवन में मैनें भी यारों, है उस पार जाना मुझे, है लगे ये भी कोई जिंदगानी है!   हर तरफ़ है भीड़, न जानें ये सफ़र कहां से कहां तक, है बस चल पड़ते सभी,मंज़िल की सभी को तलाश है! कहने को होते अपने हैं, है होता कोई नहीं किसी का, भागम भाग ज़िंदगी, और उसमें तलाश अपनों की है!   हूँ निकल पड़ा तलाश में मैं भी, कोई तो होगा अपना, हैं सब मेरे […] - [कर सामना हर चुनौती का मैं, बस आगे ही बढ़ता रहा...](https://inkalabpublication.com/i-just-kept-moving-forward-with-every-challenge-facing-tax/):   हुए ज़ुल्म इतने मुझ पर, फिर भी यारों मै अडिग रहा, चलता रहा मुश्किलों का दौर, मैं आगे ही  बढ़ता रहा! है देखा मैंने जाना भी, उनके उन हर अरमानों को भी, यूँ परेशानियों  को देख मेरे,वो मुस्कुराता रहा “प्रताप”,   रुक रुक कर मेरे राह पर,है बस कांटे ही बिछाता रहा, सब मुश्किलों का मुकाबला कर बस आगे बढ़ता रहा! उसकी हर चाल,हर हरकतें मेरा दिल समझ रहा यारों, कर सामना हर चुनौती का मैं,बस आगे ही बढ़ता रहा! बस आगे ही बढ़ता रहा… बस आगे ही बढ़ता रहा…     – डॉ.सूर्य प्रताप राव रेपल्ली  - [लहू खौल रहा सबका, अब युद्ध आर-पार का होगा....](https://inkalabpublication.com/the-blood-is-boiling-everyone-will-now-be-across-the-war/):   हो ऐसी ललकार हर तरफ़ से, अब बदला लेना होगा, शस्त्र उठा हाथों में यारों, दुश्मन को ललकारना होगा! सरहद की माटी पुकारे, कब तक जुल्म सहना  होगा, उठे दिलों में शौर्य-ज्योति,इस अंधेरे को हटाना होगा!   हैं तलवारें भी कहने लगी,हम पर धार नई कब होगी, तैयार हैं बंदूकें सारी,अब हिसाब बराबर करनी होगी! है वक्त नहीं रहा भाईचारे का, न दोस्ती न संवाद  का, गरजे तोपें, बरसें बारूद,है रण का अद्भुत दृश्य होगा!   हर सीना ऐसा हो, सीने में गोली खाने से न डर होगा, भारत भूमि के वीर लाल, हर  दुश्मन पर भारी होगा! क्यूं डरें हम साजिश से, […] - [ग़ज़ल- नही होता तुम्हारे बिन बसर अपना](https://inkalabpublication.com/there-is-no-ghazal-without-you/):   नहीं  होता   तुम्हारे   बिन  बसर अपना तुम्हारे दिल  को ही  माना है घर अपना यही  बस  पूछता  हूँ   हर  मुसाफ़िर  से कि कितना रह गया बाक़ी सफर अपना दगा   करना   नहीं   फ़ितरत  हमारी  में हमें     मालूम   है   यारो    हुनर  अपना पुरानी    याद    जब    कोई   सताती  है बहुत  ही   याद   आता   है  नगर अपना वही  महफ़िल   वही  रौनक  मुझे लगता अग़र  वो  साथ  है  तो  हर  बशर अपना नहीं  फिर  ज़िन्दगी  यह  ज़िन्दगी लगती चला  जाये अग़र  कोई  छोड़ कर अपना सुनाते  हाल  दिल   का  यह  किसे ‘राही’ यहां    लगता   नहीं   कोई   मग़र अपना     ~ रसाल सिंह ‘राही’ - [बेकरार रहता है ये दिल](https://inkalabpublication.com/this-heart-remains-desperate/): बेकरार रहता है ये दिल अक़्सर कभी उसको देखने के लिए तो कभी उसको सुनने के लिए बिन उसके मन को कहीं पर भी अब सुकूँ नहीं मिलता जो साये की तरह साथ-साथ चलता रहता है मेरे और फिर मैं भी कभी उसका दामन नहीं छोड़ता हूँ अब दर्दे दिल की दवा भी वही और मरहम भी वही जो तन्हाई में भी मुझे तन्हा नहीं होने देता है कभी मुझको रुसवा नहीं करता यादों में अपनी बातों में अपनी उलझा कर रखता है मुझे मैं अक़्सर उसकी चाहत की दस्तरस में ही रहता हूँ हर पल हर लम्हा उसी का […] - [काव्यसृजन के मंच से पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा मारे गये निर्दोष भारतियों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि](https://inkalabpublication.com/a-tribute-to-innocent-indians-killed-by-terrorists-in-pahalgam-from-the-stage-of-poetry/): मुम्बई. दिनाॅंक-४-५-२०२५ दिन रविवार को श्रीराम जानकी मंदिर बद्रीधाम नब्बे फिट रोड लालबहादुर शास्त्री नगर साकीनाका मुम्बई में रा.सा.सा.व सांस्कृतिक न्यास काव्यसृजन परिवार ने पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा निर्दयतापूर्वक मारे गये निर्दोष भारतियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।तदुपरांत उपस्थित कवियों ने आतंकवादियों को और उनके समर्थकों को अपनी ओजपूर्ण रचनाओं से खूब खरी-खोटी सुनाई। उपस्थित कवि पं.जमदग्निपुरी, पंछी प्रतापगढ़ी, ओमप्रकाश तिवारी,सजनलाल यादव, डॉ प्रमोद पल्लवी,एड.राजीव मिश्र”मधुकर”,”आत्मिक” श्रीधर मिश्र, हीरालाल यादव “हीरा” अनिल राही, नंदलाल क्षितिज,राजेश विक्रांत,डी के अग्निहोत्री,प्रा.अंजनी द्विवेदी “अनमोल”, अप्रत्यक्ष रूप से मोतीलाल बजाज,सौरभ दत्ता”जयंत”,रीता कुशवाहा, ओमप्रकाश सिंह,अभय चौरसिया आदि ने अपनी ओजपूर्ण रचनाओं से सभागार में उपस्थित […] - [देश रत्न अवॉर्ड २०२५ की ख़ुशी में सैनिक कवि उदय का हुआ भव्य स्वागत](https://inkalabpublication.com/desh-ratna-award-2025-has-a-grand-welcome-to-military-poet-uday/): देश सेवा के साथ-साथ साहित्य गतिविधियों में अपनी विशेष पहचान बनानें पर (सैनिक कवि) हेड कांस्टेबल गणपत लाल उदय को २९ अप्रेल २०२५ दूरदर्शन भवन, कमानी ऑडिटोरियम में देश रत्न अवॉर्ड २०२५ से नवाजा गया। इस खुशी में बटालियन (कमांडेन्ट) श्री अनिल कुमार, (सीएमओ) राकेश कुमार, (द्वितीय कमान अधिकारी) आलोक कुमार, (द्वितीय कमान अधिकारी) अभिराम पंकज, (डिप्टी कमांडेंट) विवेक सरोज, (डिप्टी कमांडेंट) अमित कुमार, (कम्पनी कमांडर) सुरेन्द्र कुमार यादव, अमित जोशी, विनोद कुमार, दिनेश पाल सिंह, अभिषेक कुमार चौबे, दीपक कुमार, अवधेश कुमार सिंह (एसएम) मुकेश मीना, (एसआईए ) सोनी साहब, बीएचएम सीएचएम और जवानों ने उदय को माला पहनाकर […] - [है बदली सरकार, अब किसी की खैर नहीं](https://inkalabpublication.com/the-government-is-changed-now/): चलो सब भाग चले, सरकार को छोड़, होगा आसान हमारा गुजारा,है लगता नहीं, ये ख़बर फैल रही, हर तरफ़ मेरे यारों, है बदली सरकार,अब किसी की खैर नहीं, जो लूट लिए,और किया आनंद हमनें, ग़र जांच हुआ,कोई साथ अपना देगा नहीं, सुन लो मेरे साथी, निकल लो अब भी, है सरकार के मंसूबे,लगते अब ठीक नहीं! शान से जो चल रही थी जिंदगी यारों, हुआ छेद जहाज में,बचने का मौका नहीं! जो साथ दे रहे थे अपने कारनामों में, है वही कह रहे निकल लो,अब खैर नहीं! की कोशिश, सत्ता अपनी बचा लेंगें, है हुआ ऐलान, लूटने वाले तेरी खैर […] - [कुछ जुगनू जंगल में छोड़ आते हैं..](https://inkalabpublication.com/some-firefly-leaves-in-the-forest/): हंसना हंसाना ही है जिंदगी, जीने का मज़ा लीजिए, सोचने वाले बहुत तुम पर, उन पर ही छोड़ आते हैं! छोटी सी एक मुलाकात,बन जाती हर पल की यादें, यूँ मुलाक़ात उसे अजनबी समझ,चलो कर आते हैं! जो आज साथ हम सभी, कल क्या होगा पता नहीं, भुला सब दुश्मनी,चलो अपनों से गले मिल आते हैं! हैं खुश हो रहे सभी अपने अपने अरमानों पर यारों, चलकर किसी अजनबी के, हम आसूं पोंछ आते हैं! है बहुत मीठा लगने लगा, पानी समंदर का “प्रताप”, चलो चुटकी भर नमक,हम समंदर में मिला आते हैं! हुई रात है छा गया घनघोर अंधेरा […] - [ख्याति प्राप्त गणपतलाल उदय देश रत्न अवॉर्ड 2025 से हुए अलंकृत](https://inkalabpublication.com/famous-ganpatlal-uday-desh-ratna-award-2025-ornate/):  अरांई अजमेर राजस्थान के ख्यातिनाम सैनिक कवि गणपत लाल उदय को देश सेवा के साथ-साथ उत्कृष्ट लेखन कार्य एवं सफलतम रचनाकार के लिए देश रत्न अवॉर्ड 2025 से अलंकृत किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन विभाग जम्मू-कश्मीर सरकार, द भारत न्यूज और भारती युवा वेलफेयर एसोसिएशन के द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित करके हुआ। सर्व प्रथम धरती  का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर के पहलगाम में हुएं आतंकी हमने में 28 लोगों की जान गई थी जिसकी निंदा करते हुएं मृतकों के प्रति शोक व्यक्त कर दो मिनट मौन रखा गया। यह कार्यक्रम 29 अप्रेल को […] - [जीवन प्रत्याशा पर तपिश की मार- विजय गर्ग](https://inkalabpublication.com/vijay-garg-hit-the-heat-on-life-expectancy/): देश इन दिनों हीटवेव की चपेट में है, जिसकी तीव्रता लगातार बढ़ती जा रही है। क्लाईमामीटर की नई रिपोर्ट के अनुसार, 1950 से अब तक की तुलना में वर्तमान हीटवेव औसतन चार डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म हो चुकी है। यह अंतर यूरोपीय मौसम एजेंसी कापरनिक्स के आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया है। अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि मौजूदा उष्ण लहरें पहले की तुलना में अधिक घातक हैं और इसके लिए मुख्य रूप से मानव जनित जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार है, जो अब मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, हीटवेव की तीव्रता […] - [निस्वार्थ प्रेम](https://inkalabpublication.com/selfless-love/): किसी के लिए हम जरूरी हैं तो किसी के लिए जरूरत कभी कभी ये सब समझने में सदियां लग जाती हैं कि क्या सही है और क्या गलत है कौन अपना है और कौन पराया है अपनी अमूल्य भावनाओं को ऐसी जगह खर्च करो यहां भावनाओं की क़द्र हो आपके कहे हुए शब्दों से किसी को ठेस न पहुँचे उन लोगों से रिश्ता जोड़ो जो आपका साथ नहीं छोड़ना चाहते जो आपके ही करीब रहना चाहते हैं उन लोगों से दूरियां नहीं नजदीकियां बढ़ाओ जो आपसे प्यार करते हैं जो खुद से ज्यादा आपकी परवाह करते हैं उनको समझने में […] - [सुख में दुख - विजय गर्ग](https://inkalabpublication.com/vijay-garg-sorrow-in-happiness/): आज भी यह रहस्य ही लगता है कि कुछ लोग किसी की सराहना या प्रशंसा करने में कंजूसी क्यों करते हैं! किसी के लिए प्रशंसा के दो शब्द बोलना उन्हें दो कुंतल वजन उठाने से भी ज्यादा भारी क्यों लगता है ? ऐसे लोगों से जल्दी किसी की प्रशंसा नहीं होती और औपचारिकतावश करनी पड़ जाए तो प्रशंसा की जगह कमियां बताकर उसे हतोत्साहित कर आनंद का अनुभव करेंगे। इस संदर्भ की व्याख्या पर विचार करें तो एक प्रसंग याद आता है। एक परिचित की बेटी का राज्य प्रशासनिक सेवा में चयन हुआ । घर- परिवार के लिए यह बहुत […] - [गाँव मेरा भी अब मुस्कुराता नहीं](https://inkalabpublication.com/the-village-does-not-smile-even-now/): गाँव मेरा भी अब मुस्कुराता नहीं। आह भरता मगर गुनगुनाता नहीं।। खेत में कंकरीटों की उगती फसल । धान गेहूं कोई अब उगाता नहीं।। शब्द सोहर के जाने कहां खो गए । अब ये बिरहा पराती सुनाता नहीं।। अजनबी बन गए गांव के लोग भी। कोई भी अपने सर को झुकाता नहीं।। भावनाएं अहिल्या हैं अर्जुन हुईं। राम कोई नजर आज आता नहीं।। अर्जुन प्रभात 9525925138 - [लक्ष्य में तन्मयता](https://inkalabpublication.com/target/): मन बड़ा शक्तिवान है परन्तु बड़ा चञ्चल । इसलिए उसकी समस्त शक्तियाँ छितरी रहती हैं और इसलिए मनुष्य सफलता को आसानी से नहीं पा लेता। सफलता के दर्शन उसी समय होते हैं, जब मन अपनी वृत्तियों को छोड़कर किसी एक वृत्ति पर केन्द्रित हो जाता है, उसके अलावा और कुछ उसके आमने-सामने और पास रहती ही नहीं, सब तरफ लक्ष्य ही लक्ष्य, उद्देश्य ही उद्देश्य रहता है।मनुष्य अनन्त शक्तियों का घर है, जब मनुष्य तन्मय होता है तो जिस शक्ति के प्रति तन्मय होता है, वह शक्ति जागृत होती और उस व्यक्ति को वह सराबोर कर देती है। पर जो […] - [लहू में रंगी वादियाँ पहलगाम (साझा काव्य - संग्रह) शीघ्र प्रकाश्य](https://inkalabpublication.com/paid-pahalgam-shared-poetry-collection-in-lahu-soon-public/): रचना भेजने की अंतिम तिथि – 10 मई 2025 बुक रिलीज – 10 जून 2025 लहू में रंगी वादियाँ पहलगाम (साझा काव्य – संग्रह) में प्रकाशनार्थ पहलगाम आतंकी हमले पर आधारित 2 काव्य रचनाएँ सादर आमंत्रित है । रचना के साथ आप अपना पूरा नाम, पूरा डाक पता , फोन नंबर , आपकी एक फोटो और 699 रुपए मात्र की सहयोग शुल्क की रसीद अवश्य भेजें । रचना को टाइप करके text word में ही भेजें । सभी रचनाकारों को रचना चयन – पत्र , प्रकाशन के बाद पुस्तक की 2 प्रति और सम्मान – पत्र भी दिया जाएगा । […] - [ हूँ हर पल साथ उसके, और आईने में तलाश रही....](https://inkalabpublication.com/%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%89%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%88%e0%a4%a8%e0%a5%87/): है प्यार दिल में उसके मेरे, उसकी आँखें बता रही, कर रही है इनकार, पर दिल उसकी गवाही दे रही, जाऊँ जब सामने उसके मैं,छुप कर वो देखती रही! उसकी आँखों से लगे, है ख़्वाब मेरा ही देख रही! खुले केश तो लगे, जैसे आ गए काले बादल अभी, उसकी झील सी आँखें लगे, है मुझे वो निहार रही! उसका चेहरा है लगे, खिला हुआ कमल हो जैसे, लगे केशो से गिरती वो बूंदें, हैं जैसे मोती गिर रही! कभी नजरें झुका लेती, है बातें भी टाल देती कभी, लगे दिल की धड़कन उसकी, मेरे नाम धड़क रही! जब मेरे […] - [पुरानी पेंशन](https://inkalabpublication.com/old-pension/): पुरानी पेंशन है सपना प्यारा, रिटायरमेंट में जीवन सहारा। अब आई नयी कहानी, एनपीएस की सुनो जुबानी। कहते हैं — “जमा करो बस पैसे, भविष्य बनेगा आपके जैसे!” फिर शेयर बाजार में झूला झूलो, कभी डूबो, कभी फलो-फूलो! यूपीएस भी खूब मजेदार, नाम बड़ा और दर्शन बेकार। कागज़ी घोड़े, दौड़ते दिन-रात, कर्मचारी दुखी होकर कहते अपनी बात। सरकार बोले — “बचत है भारी”, कर्मचारी बोले — “बर्बादी हमारी!” बूढ़ी हड्डियाँ कांपे डर से, सपने टूटें सुनहरे घर से। पुरानी पेंशन थी जैसे छतरी, बरसात में देती थी सुरक्षा पत्री। अब न छतरी, न कोई किनारा, सपनों का टूटा सारा सहारा। […] - [समंदर का पानी कुछ मीठा लगने लगा है](https://inkalabpublication.com/the-sea-water-is-starting-to-look-sweet/): बहुत उजाला होने लगा है अपने इस आशियाने में, रखे हुए हैं कुछ जुगनू चलो जंगल में छोड़ आते हैं! समंदर का पानी कुछ मीठा लगने लगा  है *प्रताप* यूं चुटकी भर नमक, चलो समंदर में मिला आते हैं! प्यार मोहब्बत की बातें सब करते रहते हैं ज़िन्दगी में, क्यों न किसी अजनबी को भी चलो हम हंसा देते हैं! हर तरफ़ सैलाब है, पानी का  सारे शहर में  *प्रताप* देखें किसने अपने गमों को आसूं बना बहा दिया  है! कैसे करे, कोई प्यार मोहब्बत की बातें भी यहां  पर, जाने क्यूं ज़माने ने हर तरफ़ पहरेदारी लगा रखी  है! न जाने क्यूं बहुत फूल मुरझा गए इस बगिया […] - [ये हम कहां दिल लगा बैठे........](https://inkalabpublication.com/where-do-we-sit-heart/): इश्क में हम ये क्या कर बैठे,ये हम कहां दिल लगा बैठे…….. इश्क में हम ये क्या कर बैठे, ये हम कहां दिल लगा बैठे!   ये क्या गुनाह कर बैठे, न जाने क्या हुआ दिल लगा बैठे, इश्क में हम ये क्या कर बैठे, ये हम कहां दिल लगा बैठे! हर दिन हर पल, यूं ही फिजाओं में घूमा करते थे  कभी, अब हर और दिन हर पल उनकी ही यादों में हैं खो बैठे! इश्क में हम ये क्या कर बैठे, ये हम कहां दिल लगा बैठे!   नजरें मिली थी कभी उनसे कहीं, एहसास न हुआ  मुझे, न जाने किस पल उनकी मूरत,अपनी दिल में […] - [  है ख्वाहिश दिल की रहना तुम मेरे दिल में......](https://inkalabpublication.com/%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%81/): सफ़र कलम से,          “है ख्वाहिश दिल की,                         रहना तुम मेरे दिल में……   तुम जो हो मेरी ज़िन्दगी, हो मेरे दिल की तमन्ना भी, तुम ही हो मेरे बरसों की चाहत, मेरा दिल जुनून भी! रहते हो पास मेरे, फ़िर भी है ढूंढ़ती नज़रें मेरी तुम्हें, हो जाते ग़र मुझसे दूर, सपनों में भी दिल ढूंढें  तुम्हें! हर पल हर दिन देखते तुम्हें,बीते मेरी दिन और रातें, न आए वो पल कभी, दूर हो मेरी दिल से  तेरी यादें। बस है इतनी सी चाहत,है इस दिल की आवाज़ भी, साथ रहे एक दूजे बन,न हो नज़रों से ओझल कभी! है ख्वाहिश दिल […] - [भारत देश महान है](https://inkalabpublication.com/india-is-great/): ।।भारत देश महान है।। उत्तर में हिमकिरीट सलोना दक्षिण में सागर धार है गंगा-यमुना से सिंचित भूमि की महिमा अपरंपार है ||1|| पूरब की है अरुणित धरती पश्चिम को बहती रेवा विशाल है मध्य भूमि पर शोभित मालवा अवंति बसे महाकाल हैं ||2|| भगत सिंह के लहू से सींचा गाँधी के सपनों का देश है राम-कृष्ण की कर्म भूमि पर बुद्ध के गूँजे उपदेश हैं ||3|| गीता का है ज्ञान जहाँ पर सब धर्मों का मान है प्रांत विविध और बहुभाषिकता सर्वश्रेष्ठ संविधान है ||4|| जीवन मूल्यों से गूँथी संस्कृति शस्य-श्यामला, हरित है आँचल मानव का है धर्म जहाँ पर […] - [दायित्व](https://inkalabpublication.com/obligation/): मैंने अपना बैग रखने के पहले ही टीवी ऑन कर दिया था। पहलगाम हमले के बाद से लगभग रोज का यही हाल था। तभी सात वर्षीया गुनगुन ने आकर मेरा बैग खोला कि शायद उसके लिए नित्य की भांति कुछ खाने-पीने का सामान उसके लिए उसमे होगा मगर कुछ न पाकर थोड़ी नाराज होते हुए बोली – ” क्या दादू आप भी आकर टीवी से एकदम चिपक जाते है, हम लोग टीवी एकदम नहीं देख पाते ।” ” अरे भाई देख रही हो देश पर संकट आया है, कितने निहत्थे यात्रिओं को पहलगाम में आतंकवादियों ने मार दिया , तुम […] - [यूं चुटकी भर नमक, चलो समंदर में मिला आते हैं..](https://inkalabpublication.com/just-a-pinch-of-salt-is-mixed-in-the-sea/): बहुत उजाला होने लगा है अपने इस आशियाने में, रखे हुए हैं कुछ जुगनू चलो जंगल में छोड़ आते हैं! समंदर का पानी कुछ मीठा लगने लगा है *प्रताप* यूं चुटकी भर नमक, चलो समंदर में मिला आते हैं! प्यार मोहब्बत की बातें सब करते रहते हैं ज़िन्दगी में, क्यों न किसी अजनबी को भी चलो हम हंसा देते हैं! हर तरफ़ सैलाब है, पानी का सारे शहर में *प्रताप* देखें किसने अपने गमों को आसूं बना बहा दिया है! कैसे करे, कोई प्यार मोहब्बत की बातें भी यहां पर, जाने क्यूं ज़माने ने हर तरफ़ पहरेदारी लगा रखी है! […] - [क्या हो गयी धरा राम की..?](https://inkalabpublication.com/what-has-happened-to-ram/): इनका नाम डॉo ब्रजेश बर्णवाल है। इनका जन्म 10 जून 1993 को हुआ था। ये अशोक बर्णवाल एवं यशोदा देवी के संतान हैं। ये झारखण्ड राज्य के गिरिडीह में स्थित सिंघो गांव के निवासी हैं। इन्होंने सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय से हिंदी विषय में स्नातक, स्नातकोत्तर(गोल्ड मैडलिस्ट ), कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से शिक्षा स्नातक व ग्लोबल अंतराष्ट्रीय विश्वविद्यालय से हॉनररी डॉक्टरेट की पढ़ाई की हैं। ये 10 वर्षों से लिख रहे हैं। इन्होंने अपनी पहली रचना का सृजन 2014 में किया था। ये अब तक 150 रचनाओं का सृजन कर चुके हैं। इनके अनुसार लेखन एक स्वतंत्र अभिव्यक्ति का हथियार है। […] - [अपने झील सी आँखों और दिल में बसा रखी हो.........](https://inkalabpublication.com/keep-your-lake-in-your-eyes-and-hearts/): अपने झील सी आँखों और दिल में बसा रखी हो……… यूँ लगे अंधेरे को चीरती उजाला,चाँद की किरणें हो! अपने झील सी आँखों में,और दिल में बसा रखी हो, है हर ग़म को भुला देती, लगे मधुर राग की घुन हो, हैं शब्द मीठे मिश्री से, होंठ लगे रंगे गुलाबों सी हो! जब करती बातें वो अनवरत, मिठास मिश्री सी लगे, हो जब चुप्पी चेहरे पर, अदृश्य संगीत गूंज रहा हो! चेहरे पर लगे चमकती, जैसे चाँद की वो चाँदनी हो, पलकें खुले तो लगे सबेरा, सासें खुशबू में बसी हो! होती चाहत मेरे दिल में,खो जाऊँ उसके मुस्कान में, […] - [कारे-जहाँ](https://inkalabpublication.com/car-where/): कारे-जहाँ1 आजकल इस तरह बन गये, ज़हीन2 ख़तरे में, इबलीस3 मोहतात4 बन गये! ख़ुदा ने बनाया हमें उन्वान5 देकर – “इंसान”, दैर-ओ-काबा6 बनाकर हम क्या से क्या बन गये! सहीफ़ा7 जो दिया नेक बंदे को ख़ुदा ने, जनाब खुद मसीहा, ईबादत के मरकज़8 बन गये! ख़ुदा ही रहा मेरा मुस्तहक9 अजल10 से, ये तो दुनिया के तकल्लुफ से रिश्ते बन गये! मेरी मदारत11 करते थे, मुझसे मुनाज़ात12 करते थे, सच बात जो मैने बोली, वो मेरे हरीफ़13 बन गये! आलम-ए-तलब14 के ज़ब्र15 पायनाल16 हैं देखो तो, “एहबाब” के रफ़ीक17 ही ज़फ़ाकार18 बन गये!   1. दुनिया के काम 2. समझदार […] - [मैं और तन्हाई](https://inkalabpublication.com/me-and-loneliness/): पसंद बहुत कुछ है मुझको पर चाहिये कुछ नहीं इश्क़ तो है मुझको उनसे पर मैं जताता नहीं मेरे इस दिल में अब क्या है मेरे इस दिल में कौन है यह भी जनता हूँ मैं मग़र हाले दिल सुनाता नहीं उस अजनबी से क्या है मेरा वास्ता क्या है मेरा रिश्ता आखिर कौन है वो फ़रिश्ता जिसके बिन कुछ लुभाता नहीं कोई मुझसे पूछे भी तो कह देता हूँ मैं सबसे यह बात किसी के दिये हुए ये ज़ख़्म किसी को मैं दिखाता नहीं कभी अपना कहते हो मुझे कभी पराया कह देते हो छोड़ दिया जिसे एक बार […] - [पहलगाम : भर लो लहू में उबाल आज स्वराष्ट्र है पुकार रहा](https://inkalabpublication.com/pahalgam-fill-in-blood-boil-is-calling-today-swarashtra-is-calling/): हिन्द के नौजवानों आज हिंद है पुकार रहा भर लो लहू में उबाल आज स्वराष्ट्र है पुकार रहा खामोशी ये तोड़ सिंघ नाद बन गरजिए देश के शत्रुओं को शक्ति प्रबल ,अपनी दिखाइए खोए नन्हे पुष्प हमने नौजवान भी खोए कई बहनों की मांग चीखी नन्हें मुख से चीखे गूंजी चीखों को उन मासूमों की मन ज्वाला बनाइए हिन्द के नौजवानों आज हिंद है पुकार रहा भर लो लहू में उबाल आज स्वराष्ट्र है पुकार रहा बर्फ की वादियों में बहती रक्त धारा है प्रचंड हुई उस रक्त धारा को शक्ति का प्रचंड स्वरूप बनाइए हिन्द के नौजवानों आज हिंद […] - [कविता - इंसानियत का अंत](https://inkalabpublication.com/%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4/): धरा हिली, गगन रोया, लहू से भीगा पथ, पहलगाँव की वादियों में फैला आतंक रथ। भोले-भाले तीर्थ यात्री, श्रद्धा जिनकी शान, धर्म पूछ कर मार दिए, कैसा यह अपमान? काश्मीर की पावन धरती, फिर से पूछे सवाल, क्या ऐसे होंगे सपूत, जो बनें काल का भाल? काँप उठे ये दुश्मन सारे, जिनका धर्म है पाप, भारत माँ की गोदी में अब न चलेगा श्राप। शौर्य जगे हर हिंदुस्तानी में, अग्नि बनें प्रचंड, जैसे हनुमान ने लंका जलाई, वैसे ही हों चंड। नर-नारी सब एक स्वर में, गूँजे जय जयकार, “अब न बख्शेंगे आतंकी, होगा न्याय अपार!” वो जो निर्दोषों पर […] - [पहलगांव](https://inkalabpublication.com/pahalgaon/): मां भारती पुकारती उठो रे सूर साहसी। ना रहो तुम तुष्णीम् चुप्पी अपनी तोड़ दो जो उठाए धर्म पर शस्त्र पाद हस्त तोड़ दो। भारती पुकारती उठो रे सूर साहसी जो करे ये दुस्साहस शस्त्र उस पर वार दो भारती का नाम लेकर घर में जाके मार दो। भारती पुकारती उठो रे सूर साहसी उठो रे सूर साहसी। राज सारस्वत पथिक (राजस्थान) - [ज्यादा नहीं ये बस दो चार दिन तक चलेगा](https://inkalabpublication.com/not-much-it-will-last-for-two-to-four-days/): ज्यादा नहीं ये बस दो चार दिन तक चलेगा ये पुलवामा 2.o है कुछ और दिन तक चलेगा गयी है जान बहुत सारे मासुम लोगों की ये अवाम का खून बस कुछ दिन तक खौला रहेगा करते रहेंगे ये सियासत दान सियासत हादसों पर भी! ये हादसा इनके चुनाव के प्रचार खत्म होने तक चलेगा जीन मासुम बच्चो के सर से पिता का साया उठ गया ऊन मासुमो का जख्म ताजा सारी ज़िन्दगी तक रहेगा क्या लौटा सकते हो तुम उनके मांग की सिन्दुर को उनकी आँखो मे इंतेजार और आंशु ता उमर तक रहेगा कवित्री चाँद - [डॉ सत्येन्द्र कुमार की कहानी - गुरु बिन ज्ञान कहां से पाऊं](https://inkalabpublication.com/where-should-i-get-the-story-of-dr-satyendra-kumar-guru-bin-gyan/): संत फरीद अत्यंत ही सरल, प्रखर ज्ञानी, प्रभावशाली व्यक्तित्व थे। कहते हैं जागृत अवस्था में ही वे प्रभु से सीधा वार्तालाप कर लेते थे। उनके अनेकों शिशु हुए जो ज्ञानी और पहुंचे हुए थे। एक बार एक प्रिय शिष्य गुरु संत फरीद से सीधा सवाल कर दिया, महात्मन, आप इतने प्रकांड ज्ञान और मानव रहस्यों के जानकार हैं, पर आपका गुरु कौन है जिसकी कृपा ने आपको चमत्कारी संत बना दिया है? शिष्य का प्रश्न सुनकर संत चुप हो गए और कुछ सोचने लगे फिर कहा गुरु एक हो तो तुम्हें बताऊ, मुझे तो न जाने कितने गुरुओ ने ज्ञान […] - [स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अशरफ अली की स्मृति में कविसम्मेलन हुआ](https://inkalabpublication.com/kavis-sammelan-took-place-in-memory-of-freedom-fighter-fighter-ashraf-ali/): टीकमगढ़//स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अशरफ अली शाह की स्मृति में नगर भवन पैलेस टीकमगढ़ में एक कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रभारी डी.ईओ. श्री परासर ने की एवंमुख्य अतिथि के रूप में टीकमगढ़ विधायक श्री यादवेन्द्र सिंह बुन्देला एवं नगरपालिका अध्यक्ष श्री अब्दूल गफ्फार जी (पप्पू मलिक) रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप म.प्र.लेखक संघ के अध्यक्ष राजीव नामदेव ’राना लिधौरी’ व शासकीय जिला पुस्तकालय के लाइबे्ररियन श्री विजय मेहरा एवं बुन्देली कवि प्रभुदयाल श्रीवास्तव रहे। कवि सम्मेेलन का संचालन रविन्द्र यादव ने किया।   अपने उद्वोधन में टीकमगगढ़ विधायक श्री यादवेन्द्र सिंह बुन्देला कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी […] - [‘राना लिधौरी’ के ब्लाग पाठक व्यू संख्या दो़ लाख से अधिक पहुँची टीकमगढ़ जिले के उभरते हुए ब्लाॅगर](https://inkalabpublication.com/rana-lidhauri-blog-reader-view-number-reached-more-than-two-lakhs-emerging-blogs-in-tikamgarh-district/): टीकमगढ़/ बुन्देलखण्ड के ख्यातिप्राप्त कवि राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी की के ब्लाग पाठक व्यू संख्या आज दो लाख को पार कर गयी है अब तक उनके 91 देशों के 200083 पाठक है एवं सोशल मीडिया पर पाँच लाख से अधिक पाठक हैं उनके ब्लाग *राजीवरानालिधौरीब्लाग स्पाट डाॅट काम *(Blog – rajeevranalidhori.blogspot.com)* को बहुत पसंद किया जा रहा है। राना लिधौरी ने बताया कि उनके ब्लाग पर 881 पोस्ट में हिन्दी एवं बुन्देली में कविताएँ एवं आलेख आदि लिखे गए हैं। जिनको 91 देशों के लोग पढ़ते हैं। इस प्रकार से राना लिधौरी हिन्दी एवं बुन्देली को विश्वपटल पर लोकप्रिय बनाने […] - [हाइकु कविता](https://inkalabpublication.com/haiku-poem/): ‘राना लिधौरी’ के #हाइकु:- (1) दुष्ट लोग तो, सदा कमी देखते। दूसरों में ही।। *** (2) दुख देखके सदा ही खुश होते। दूसरों में ही।। *** (3) खुद के दोष दूसरों में ही झाँके। खुद को आं आँके।। *** हाइकुकार- राजीव नामदेव “राना लिधौरी” संपादक “आकांक्षा” पत्रिका संपादक- ‘#अनुश्रुति’ त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़ अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी, टीकमगढ़ (मप्र)-472001 मोबाइल- 9893520965 Email – ranalidhori@gmail - [अब तो हो बस आर या पार..... इस कविता ने पाकिस्तान को उसकी औकात दिखा दिया , हर हिन्दुस्तानी को यह कविता जरूर पढ़नी चाहिए](https://inkalabpublication.com/now-it-is-just-just-or-this-poem-showed-pakistan-its-status/): कविता – है हर दिल की यही पुकार,अब तो हो बस आर या पार….. थी जो हरियाली से भरी, हमारी पावन धरती कभी, इन नापाक इरादों ने कर दिया इसे है खून से लाल! हर दिल धड़क रहा था, सुकून से इस धरा पर यारों, है आज बेचैन हर घर परिवार, इस धरती का लाल! है जिसने अंजाम दिया,आज उसे सबक देना होगा, इन मीठी बातों को छोड़, कुछ न कुछ करना होगा! बहुत हुआ अब शांति वार्ता,है बहुत हुआ भाईचारा, हुए उन शहीदों का बदला, अब हमें भी लेना होगा! हो इरादे लहरें समंदर सी, हर दिल में अब […] - [विजय गर्ग की मशहूर कहानी- बुजदिल एक बार आप भी अवश्य पढ़ें](https://inkalabpublication.com/vijay-gargs-famous-story-bujdil-once-you-must-also-read/): कलावती के पत्नी बन कर उस की जिंदगी में आने के बाद क्या उस की किस्मत ने भी करवट ली थी या सचाई कुछ और ही थी? सुंदर के मन में ऐसी कशमकश पहले शायद कभी भी नहीं हुई थी. वह अपने ही खयालों में उलझ कर रह गया था. सुंदर बचपन से ही यह सुनता आ रहा था कि औरत घर की लक्ष्मी होती है. जब वह पत्नी बन कर किसी मर्द की जिंदगी में आती है, तो उस मर्द की किस्मत ही बदल जाती है. सुंदर सोचता था कि क्या उस के साथ भी ऐसा ही हुआ था? […] - [अश्रु रोके रुके नहीं - पहलगाम आतंकी हमले पर ये क्या लिख दिया मशहूर कवयित्री किरण बैरवा ने जो भी पढ़ा रो दिया आप भी पढ़ें](https://inkalabpublication.com/tear-stop-did-not-stop-what-did-the-famous-poetess-kiran-bairwa-write-on-the-pahalgam-terror-attack/): कविता – अश्रु रोके रुके नहीं भू अम्बर भी शर्मसार हुआ ये कैसा हमलावार हुआ बेजान शव रखा गोद में अश्रु रोके रुके नहीं छटपटा रहा तन मन जिसका अर्थ न कुछ रह जाता मौन हो गई प्रकृति जिसकी कश्मीर जो कहलाता   उठो तुम बताओ सबको सुकून कैसे खो गया हिंदू मुस्लिम के नाम पर कैसे इंसान बॅंट गया लहू से सना शरीर देखकर हृदय क्यों नहीं दहल गया बॅंटवारा तो तुमने किया ईश्वर की तो थे तुम सुंदर कृति अपनी रचना पर अफसोस कर रही वो अदृश्य शक्ति भू अम्बर भी शर्मसार हुआ ये कैसा हमलावार हुआ   […] - [मिलन जुदाई और ख़ुशबू की शायरा परवीन शाकिर](https://inkalabpublication.com/milan-separation-and-fragrance-shayra-parveen-shakir/): -डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफ़री बिहार में दरभंगा के पास चंदन पट्टी नाम का एक गांव है,जहां परवीन शाकिर का कुंबा रहता था.भारत-पाक विभाजन के पहले उनके पिता रोज़गार की तलाश में कराची चले गए जहां 24 नवंबर 1953 को परवीन की पैदाइश हुई.ख़ुदा ने उन्हें वह सब कुछ दिया था, जिसकी एक लड़की सपने देखती है. देखने में वह निहायात ही खूबसूरत और सलीके मंद थीं.विदेशों से पढ़ाई हुई..अंग्रेज़ी से एम फ़िल करने के बाद वो प्रोफ़ेसर बनीं, फिर जल्दी ही अपने क़ाबिलियत और मेहनत के बल पर पाकिस्तान की सिविल सेवा में शामिल हो गईं. कॉलेज के दिनों में […] - [डा. ज़ियाउर रहमान जाफ़री की 10 ग़ज़लें](https://inkalabpublication.com/10-ghazals-of-dr-ziaur-rahman-jafri/): ग़ज़लें ——— -डा. ज़ियाउर रहमान जाफ़री ( 1) तुम्हारे सब गिले अच्छे नहीं हैं मुकम्मल तज़किरे अच्छे नहीं हैं बता कर सब हक़ीक़त रख रहे हैं कहीं से आईने अच्छे नहीं हैं शिकायत मुझसे ही होती रही है मगर वो भी बड़े अच्छे नहीं हैं अंधेरों की रही है बस शिकायत जो जलते हैं दिये अच्छे नहीं हैं दिलों में नफरतें महफूज करके जो मिलते हैं गले अच्छे नहीं हैं अभी नासाज़ है तबीयत हमारी अभी ये तज़किरे अच्छे नहीं हैं ग़ज़ल में नाम मेरा भी रहा है तुम्हारे तबसिरे अच्छे नहीं हैं ————————- (2) जिसे चाहा वहीं धोखा हुआ […] - [ज़िन्दगी](https://inkalabpublication.com/life/): वो जो आज किस्से कहानियों में है कभी ज़िंदगी का हिस्सा हुआ करता था।। ~रसाल सिंह ‘राही’ - [पहलगाम हादसा](https://inkalabpublication.com/pahalgam-accident/): कभी सोचा नहीं था कश्मीर की वादियों में ऐसा माहौल बनेगा ऐसा ख़ौफ़नाक मंज़र ऐसा दर्दनाक हादसा देखने को मिलेगा जिससे सबकी रूह कांप उठी है जिस तरह से लग रहा था कि कश्मीर के हालात बेहतर हो गये हैं मग़र यह सब देखकर लगता है कि ऐसा नहीं हुआ और अब ऐसा लग रहा है कि जैसे चारों ओर बस ख़ामोशी ही ख़ामोशी छाई हुई है सब कुछ मुरझाया हुआ सा नज़र आ रहा है हर किसी के अंदर डर सा बैठ गया है उन बेगुनाहों की चीखें पूरी दुनियां में गूँज रही हैं अब कोई वहां जाने के […] - [हिन्दी दोहे- उदित करो शुभ कर्म](https://inkalabpublication.com/hindi-couplets-do-good-deeds/): राना कहता आपसे,उदित करो शुभ कर्म। इसके पहले आपको,पड़े निभाना धर्म। हर कामों के धर्म हैं,जिनको कहें उसूल। राना होते है उदित,उसी तर्ज पर फूल।।   अंतराल से मित्र जब,आकर दे सम्मान। आज उदित कैसे हुए,हँसता राना आन।। अस्ताचल के बाद ही,सदा उदित हो भान। राना यह संसार का,सबसे सुंदर गान।।   अब गुदड़ी के लाल भी,करते बहुत कमाल। राना होकर वह उदित,जग में देते ताल।।     ✍️ -राजीव नामदेव “राना लिधौरी” संपादक “आकांक्षा” हिंदी पत्रिका संपादक- ‘अनुश्रुति’ त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़ अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी, टीकमगढ़ […] - [कहानी:  अजनबी खिड़की](https://inkalabpublication.com/stranger-window/): रेखा को वो पुराना घर किराए पर मिला था—शहर की हलचल से थोड़ा दूर, शांत और पेड़ों से घिरा हुआ। एक लेखक के लिए इससे अच्छी जगह क्या होती? एकांत, शांति और समय। घर में सब कुछ ठीक था, बस ऊपर की एक खिड़की अजीब लगती थी। वो खिड़की बाहर की ओर खुलती थी, लेकिन अंदर से बंद नहीं होती थी। जब भी रेखा सीढ़ियाँ चढ़ती, वो खिड़की खुली मिलती… हवा नहीं थी, लेकिन पर्दा हर बार हिलता रहता। शुरू में उसने ध्यान नहीं दिया। लेकिन फिर, एक रात, जब वह अपनी किताब पर लिख रही थी, उसने खिड़की के […] - [युद्ध का बिगुल बजाओ](https://inkalabpublication.com/play-the-bugle-of-war/): हम ही राम भी है जपते हम ही कृष्ण भी है जपते हम जपते हैं विष्णु हम ही शिव भी जपते   हम हिन्दू है शिव को भी है पूजते शिव है प्रलयकारी शिव है तांडव भी करते जब जब कोई अधर्म बड़े शिव नेत्र अपना तीसरा खोल वध उनका है करते   यही है क्षत्रपति शिवाजी यही है वीर सांभा राजे भी जिन्होंने किए थे युद्ध स्वराज के लिए जिन्होंने ललकारा था कट्टरपंथी को   आज फिर युद्ध का बिगुल बजाओ जागो हिंदुओं अपना हिंदू धर्म निभाओ बहुत देख लिया बहता हुआ खून हमने अपनो का बहुत ओढ़ लिया […] - [पहलगाम आतंकी हमला](https://inkalabpublication.com/pahalgam-terrorist-attack/): पहलगाम आतंकी हमला🥹🥹 सभी निर्दोष लोगों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏🙏🙏 अम्बर की गर्जना किंचित लगी रुद्र करुण स्वर के आगे देख खून से लथपत मासूमियत को बेजान धरा भी आलाप कर रही ईश्वर के आगे धर्म अधर्म का कैसा ये यहां खेल रच गया तूने सबको एक बनाया फिर मानव कैसे धर्म में बट गया कैसा ये वहशीपन मानव भीतर बस गया इनके बर्बरता के आगे राक्षस कुल भी शर्म से झुक गया सिस्टम की लापरवाही कहे या धर्म का बंटवारा वापस कहा से लाऊ मै अब वो हंसता खेलता संसार प्यारा मेहंदी के हाथों में खून की ये कैसी […] - [खोलो द्वार सीमाओं का](https://inkalabpublication.com/open-gates-of-borders/): पहलगाम का सामूहिक ये भीषण नरसंहार, मांग रहा अपनो से ही अब अपनो का हिसाब। उनकी साफगोईयों का ये कैसा उनको सिला मिला , खामोश सिंह को कहि कायर तो नहीं समझ लिया। निकले निहत्थे वे सब थे जन्नत की एक सैर को , उनकी कब्रगाह बना दिया तूने ही उस जन्नत को। कभी सोचता हूँ जब इन कायर जाहिलों के बारे में , बनते मर्द ये नामुराद निहत्थों पर वॉर कर के। हिम्मत रत्ती भर भी थी तो सामने खुल कर आते , हथियार फेंक सामने से दो-दो हाथ तो कर जाते। देखते तेरी माता ने तुम्हे कितना दूध […] ## Pages - [Publish your articles](https://inkalabpublication.com/publish-your-articles/) - [competition](https://inkalabpublication.com/competition/) - [स्वर्णिम काव्य-कथा प्रतियोगिता](https://inkalabpublication.com/swarnim-kavya-katha-pratiyogita/) - [Inkalab Publication Team](https://inkalabpublication.com/inkalab-publication-team/): 1. संस्थापक / निदेशक (Founder / Director)-  रमाकांत यादव 2. प्रबंधक (Manager) –  प्रीति रमाकांत यादव 3. संपादक-इन-चीफ (Editor-in-Chief)- मीनू अग्रवाल 4.  वरिष्ठ संपादक (Senior Editor)- डॉ. नीरज पखरोलवी 5. कार्यकारी संपादक (Executive Editor) – प्रमोद कुमार गौड़   6. 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Extra charges […] - [My account](https://inkalabpublication.com/my-account/) - [Checkout](https://inkalabpublication.com/checkout/) - [Book Store](https://inkalabpublication.com/) - [Contact And  Business Address](https://inkalabpublication.com/contact/): आपकी सेवा में सदैव तत्पर. इंकलाब पब्लिकेशन से आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित कराएं और करोड़ों पाठकों तक तुरंत पहुँचें। Business Address- [inkalab Publication , R.P Residency ( R.P Homes) , B WINGS, FLAT NO. 506 , DESALE PADA , Gajanan Patil Chowk , NANDIVALI ROAD , DOMBIVLI ( EAST ) THANE, MAHARASHTRA, PIN CODE- 421201, E-mail: info@inkalabpublication.com Mobile and Whatsapp Number -9819273616 - [About Publication](https://inkalabpublication.com/about-publication/): About Publication COMPANY ALLOCATED BY Aaple Sarkar Government of Maharashtra , Udyam Adhar And GSTIN/UIN  AUTHORIZED SIGNATORY/CEO – RAMAKANT YADAV DIRECTOR OF COMPANY – PRITI RAMAKANT YADAV REG. NO. – 2410200319169412GSTIN/UIN NUMBER – 272500045377ES5 UDYAM ADHAR/MSME NUMBER – UDYAM-MH-18-0063950 MOBILE NUMBER – 9819273616 COMPANY ESTABLISHED DATE – 14/07/2019 Address- [inkalab Publication , R.P Residency ( R.P Homes) , B WINGS, FLAT NO. 506 , DESALE PADA , Gajanan Patil Chowk , NANDIVALI ROAD , DOMBIVLI ( EAST ) THANE, MAHARASHTRA, PIN CODE- 421201, E-mail: info@inkalabpublication.com Mobile and Whatsapp Number -9819273616 ## Products - [Anubhavon Ka Nayak।अनुभवों का नायक। काव्य संग्रह। Gullu Ambar। गुल्लू अंबार](https://inkalabpublication.com/product/anubhavon-ka-nayak/) - [काव्य कारवाँ साझा काव्य संग्रह](https://inkalabpublication.com/product/kavay-karvan-sajha-kavya-sangrha/) - [यज्ञ काव्य अमृत । Yagya Kavya Amrit । यज्ञसेनी साहू । Yagyaseni Sahu](https://inkalabpublication.com/product/yagya-kavya-amrit/) - [Overdrafted Lives: A Banking Tale । Swati Ashwini Bhardwaj](https://inkalabpublication.com/product/overdrafted-lives-a-banking-tale/) - [अनन्या की डायरी (उपन्यास) । डॉ. रामशंकर चंचल । Ananya ki Diary (Novel)। Dr. Ramshankar Chanchal](https://inkalabpublication.com/product/ananya-ki-dayari-novel/) - [मेरे दर्द - ग़ज़ल संग्रह । Mere Dard Ghazal Collection । Dr. Sagar](https://inkalabpublication.com/product/mere-dard-ghazal-sangrha/) - [मन की उमंग साझा काव्य संग्रह](https://inkalabpublication.com/product/man-ki-umang-sajha-kavya-sangrha/): इस संकलन में सम्मिलित सभी रचनाकार न केवल अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं, बल्कि उनकी प्रतिभा और भी निखरकर सामने आई है। सभी ने व्यापक दृष्टिकोण के साथ योगदान दिया है। किसी ने नए विचार प्रस्तुत किए हैं तो किसी ने प्रचलित विषयों को भी नए संदर्भों में रखा है। यही कारण है कि यह साझा संकलन केवल पठनीय ही नहीं, अपितु संग्रहणीय भी बन गया है। जब भी मन चाहे, इसे पढ़कर अपने मन की उमंगों को उड़ान दी जा सकती है। बाक़ी अंतिम निर्णय तो आपके हाथ में है—आप सुधि पाठकों के ही हाथ में। - [शिव का सावन (साझा काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/shiva-ka-savan-sajha-kavya-sangrha/): “शिव का सावन” केवल काव्य-संग्रह नहीं, बल्कि जीवन दर्शन की पुस्तक है। यह पाठकों को भक्ति, सकारात्मकता और जीवन में आशा का दीपक प्रदान करती है, जिससे सावन की अलौकिक छटा का अनुभव हर हृदय में जीवित होता है। - [काव्य की गूँज साझा काव्य संग्रह । Kavya Ki Goonj ।](https://inkalabpublication.com/product/kavya-ki-goonj/): “काव्य की गूँज” मात्र एक संग्रह नहीं, अपितु अनेक संवेदनशील हृदयों की पुकार, अनुभूतियों की प्रस्तुति और मानवता के प्रति हमारी सच्ची अभिव्यक्ति है। मुझे विश्वास है कि यह काव्य-संग्रह पाठकों के हृदय में भी वैसी ही संवेदनाओं की गूँज उत्पन्न करेगा, जैसी इसकी रचना के समय रचनाकारों के अंतर्मन में व्याप्त थी। आशा है कि यह संकलन पाठकों के मन को छूएगा और साहित्यिक यात्रा में नई ऊर्जा प्रदान करेगा। आप सभी पाठकों से विनम्र आग्रह है कि इस काव्य-संग्रह को अपनाएँ, पढ़ें और साझा करें—ताकि इसकी गूँज दूर तक सुनाई दे। - [ऑपरेशन सिंदूर (देशभक्ति साझा काव्य संग्रह)। operation sindoor । Patriotic poetry collection । Inkalab Publication](https://inkalabpublication.com/product/operation-sindoor/): “Operation Sindoor” is not just a book, but it is a document of those countless feelings, sentiments and resolutions that pulsate in the heart of every true Indian for the motherland. On one hand, this shared poetry collection has a strong roar of heroism, and on the other hand, a heartfelt remembrance of those sacrifices that made our freedom and security immortal. In Indian culture, sindoor is not only a symbol of marital bliss, but it is also a symbol of the trust, love and security that our soldiers protect by sacrificing their lives on the borders. When the storms […] - [लोकप्रिय हिन्दी कहानियाँ। kahani sangrah।hindi kahani sangrah।](https://inkalabpublication.com/product/lokpriya-hindi-kahaniyan-kahani-sangrh/): The stories in this book are from various creators chosen from different corners of Hindi literature — both emerging and experienced. This blend gives the collection a balanced form, where the depth of experience and the freshness of new perspectives come together to engage the readers. Each writer brings a distinct viewpoint shaped by their language, environment, and sensibility, enriching the diversity of the book. The language is the second strong link of this collection. The stories are neither written in an artificial style nor entangled in complex jargon. The language is simple, conversational, and filled with emotions — allowing […] - [साँझ के साए (साझा कहानी संग्रह) । kahani sangrah।hindi kahani sangrah।](https://inkalabpublication.com/product/sanjh-ke-saye-kahani-sangrha/) - [राम जाने (लघुकथा संग्रह) । Ram Jane । Dr. Ramshankar Chanchal ।](https://inkalabpublication.com/product/ram-jane/) - [स्पर्श तेरा छू गया मन मेरा (काव्य संग्रह) । Sparsh Tera Chhu Gaya Man Mera।](https://inkalabpublication.com/product/sparsh-tera-chhu-gaya-man-mera/) - [पिघलते हिमखंड (काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/pighalte-himkhand-kavya-sangrha/) - [क्षितिज संवाद काव्य संग्रह । Kshitij Samvad Kavya Sangrha](https://inkalabpublication.com/product/kshitij-samvad-kavya-sangrha/): आज जब रचनात्मकता अनेक माध्यमों से बिखर रही है, तब ऐसी पुस्तकें लेखन को एक संरचित और गरिमामयी मंच देती हैं। यह पुस्तक बताती है कि कविता का स्वर अब भी जीवंत है, और उसकी गूंज समाज के हृदय तक पहुँचने में सक्षम है। प्रत्येक रचनाकार ने अपनी कविताओं में जीवन के किसी न किसी पहलू को सजीव किया है — जैसे “माँ ख्वाब में आती है”, “उम्र की साँझ”, “कागज़ कोरा कागज़”, “कैसा दौर आया” जैसी कविताएं पाठकों को भावुक ही नहीं करतीं, बल्कि सोचने पर विवश भी करती हैं। ये कविताएं पाठक को भीतर तक झकझोर देती हैं […] - [रुहानी राग (काव्य संग्रह) । Ruhani Rag Kavya Sangrha ।](https://inkalabpublication.com/product/ruhani-rag-sajha-kavya-sangrha/) - [सृजन की आशा । Srijan Ki Asha](https://inkalabpublication.com/product/srijan-ki-asha/) - [यशश्विनी (काव्य-संग्रह) । गुरु प्रसाद 'गुरु'](https://inkalabpublication.com/product/yashashivini-kavya-sangrha/) - [मन होता है। आंचलिक कविताएँ। (काव्य संग्रह)-डॉ. रामशंकर चंचल](https://inkalabpublication.com/product/man-hota-hai-anchalik-kavitayen/) - [आधुनिक सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ। हिंदी कहानी संग्रह। hindi kahani sangrah । kahani sangrah in hindi । हिंदी कहानी संग्रह pdf](https://inkalabpublication.com/product/adhunik-sarvshreshth-kahaniyan/): इस संग्रह में भारतीय मूल के, हिंदी साहित्य-जगत के सर्वश्रेष्ठ कहानीकारों की उत्कृष्टतम कहानियों को संकलित किया गया है। ये कहानियाँ हिंदी भाषा की आधुनिक साहित्यिक धरोहर हैं और केवल हमारे तक ही सीमित न रहें, इसलिए इन्हें आप सभी सुधी पाठकों तक पहुँचाने का यह प्रयास किया गया है। इस कार्य को पूर्ण कर आपके समक्ष प्रस्तुत करते हुए मुझे अपार हर्ष एवं गर्व की अनुभूति हो रही है। - [फागुन फुहार। Phagun Phuhar। (साझा काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/phagun-phuhar/) - [अनमोल कहानियाँ । हिंदी कहानी संग्रह। hindi kahani sangrah । kahani sangrah in hindi । हिंदी कहानी संग्रह pdf](https://inkalabpublication.com/product/anmol-hindi-kahaniyan/): “अनमोल कहानियाँ” पाठकों को एक नई दृष्टि से जीवन को देखने और समझने की प्रेरणा देगी। आशा है कि यह संग्रह सभी पाठकों के हृदय में अपनी विशेष जगह बनाएगा और उन्हें जीवन के सार्थक अर्थों की ओर अग्रसर करेगा।  “अनमोल कहानियाँ” एक ऐसा  कहानी-संग्रह है, जिसमें लेखकों ने मानव भावनाओं, जीवन के अनछुए पहलुओं और समाज के अलग-अलग पहलुओं को अनोखे ढंग से प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक पाठकों को जीवन के उन हिस्सों से जोड़ती है, जिन्हें अक्सर व्यस्तता और आधुनिकता के दौर में भुला दिया जाता है। - [जज़्बात-ए- ग़ज़ल । ग़ज़ल संग्रह । Gazal Sangrha ।](https://inkalabpublication.com/product/zazbat-e-gazal/): “जज़्बात-ए-ग़ज़ल” सिर्फ़ एक ग़ज़ल-संग्रह नहीं, बल्कि यह एक ऐसा दर्पण है, जिसमें समाज, प्रेम, राजनीति और मानवता की झलक दिखाई देती है। सियाराम यादव ‘मयंक’ जी ने इस संग्रह में अपने भावनात्मक अनुभवों और सामाजिक सरोकारों को इतनी सहजता से पिरोया है कि हर पाठक इससे जुड़ाव महसूस करता है। यह पुस्तक न केवल ग़ज़ल प्रेमियों के लिए, बल्कि उन सभी के लिए आवश्यक है जो साहित्य के माध्यम से समाज को समझना चाहते हैं। - [झाबुआ की काली (लघुकथा-संग्रह) । Jhabua Ki Kali । Short Stories](https://inkalabpublication.com/product/jhabua-ki-kali-short-stories/): इस पुस्तक की कहानियाँ केवल आदिवासी जीवन और उनके संघर्षों की गाथा नहीं हैं, बल्कि यह मानवता, प्रेम, साहस, और सामाजिक विद्रूपताओं का सजीव चित्रण हैं। ‘झाबुआ की काली’ जैसी कहानियाँ जहाँ एक ओर महिला शोषण के खिलाफ विद्रोह का प्रतीक बनती हैं, वहीं ‘मुखिया’ जैसी कहानियाँ पारिवारिक प्रेम और संबंधों की सजीवता को दर्शाती हैं। - [काव्य शिखर । Kavya Shikhar । (साझा काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/kavya-shikhar-sajha-kavya-sangrhha/): साहित्य समाज का दर्पण होता है, और काव्य उसकी आत्मा। कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं होती, बल्कि यह हृदय की भावनाओं, जीवन के अनुभवों, समाज की वास्तविकताओं और आत्मा की गहराइयों को प्रकट करने का सशक्त माध्यम होती है। इसी भावना को समेटे हुए “काव्य शिखर” एक ऐसा साझा काव्य संग्रह है, जिसमें विभिन्न रचनाकारों की संवेदनाएँ, अनुभूतियाँ और विचार सम्मिलित हैं। यह संकलन काव्य प्रेमियों के लिए एक अमूल्य भेंट है, जिसमें प्रेम, नारी सशक्तिकरण, सामाजिक चेतना, आध्यात्म, संघर्ष, प्रकृति और राष्ट्रीय भावना जैसे महत्वपूर्ण विषयों को बेहद संवेदनशील और भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया है। संपादक […] - [ऐसा देश है मेरा । Aisa Desh Hai Mera ।](https://inkalabpublication.com/product/aisa-desh-hai/) - [तिरंगा मासिक पत्रिका (दिसंबर 2024)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b8/) - [कितनी बार कहा साथी (पातियाँ प्यार की) काव्य - संग्रह](https://inkalabpublication.com/product/kitani-bar-kaha-sathi-patiyan-pyar-ki/) - [काव्य दीप (साझा काव्य संग्रह) दीपावली विशेषांक](https://inkalabpublication.com/product/kavyadeep/) - [तिरंगा मासिक पत्रिका नवंबर 2024](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%82/): तिरंगा मासिक पत्रिका इंकलाब पब्लिकेशन मुंबई द्वारा प्रकाशित होती है। यह अंक दीवाली विशेषांक है। - [लघु प्रभा (लघुकथा संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/laghuprabha-laghukatha-sangrha/) - [रघुनन्दन (साझा काव्य -संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/raghunandan/) - [कल्पनाओं के पंख (साझा काव्य-संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/kalpnaon-ke-pankh/): यह काव्य संग्रह निश्चित रूप से हम सभी के जीवन में व्याप्त उन पहलुओं की काल्पनिक उड़ान है, जिन्हें हम वास्तविकता में प्राप्त करना चाहते है। - [दियाप्रीत (Diyapreet) साझा काव्य-संग्रह](https://inkalabpublication.com/product/diyapreet-sajha-kavya-sangrha/): भारतीय साहित्य में काव्य का एक विशिष्ट स्थान है। यह न केवल भावनाओं का सरल और सजीव माध्यम है, बल्कि विचारों की अभिव्यक्ति का भी सशक्त उपकरण है। काव्य में अनुभूतियों, विचारों और कल्पनाओं को भाषा की सीमाओं से परे ले जाने की शक्ति होती है, और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। इसी भावना को सजीव करता है ‘दियाप्रीत’ साझा काव्य-संग्रह, जिसका संपादन प्रीतपाल सिंह ‘प्रीत’ जी द्वारा अत्यंत समर्पण और कुशलता के साथ किया गया है। यह काव्य-संग्रह भारत के विभिन्न राज्यों के श्रेष्ठ रचनाकारों की श्रेष्ठ काव्य रचनाओं का एक ऐसा गुलदस्ता है, जिसमें हर कविता एक […] - [आनन्द प्रकाश शर्मा की कविताएँ (काव्य-संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/anand-prakash-sharma-ki-kavitayen/) - [मन की बातें (साझा काव्य-संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/man-ki-baaten-sajha-kavya-sangrha/): इसी पुस्तक से……  जाने क्या बात है तुम्हें सोचूँ तो मौसम की तासीर बदल जाती है कभी रिमझिम बरसती हैं बूंदें कभी मखमली सी धूप खिल जाती है। - [रूप नहीं रूह है यह (काव्य-संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/roop-nahin-roop-hai-yah/): “रूप नहीं रूह है यह” एक गहन और संवेदनशील काव्य-संग्रह है, जिसकी रचनाएं हृदय को छू लेने वाली हैं। इस पुस्तक के लेखक, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामशंकर चंचल जी, ने अपनी कविताओं के माध्यम से भावनाओं के विभिन्न पहलुओं को सजीव किया है। उनकी लेखनी सरल होने के बावजूद गहरी और आत्मिक अनुभूतियों से भरी हुई है। पुस्तक में शामिल कविताएं जैसे कि “चलो न कुछ दूर” और “जिन्दगी, जिन्दगी से करती रही सवाल” मानवीय संबंधों और जीवन के गहरे सवालों पर विचार करती हैं। “तो तुमने पलके झुका ली” में व्यक्ति के भीतर की असहायता और समर्पण को उकेरा […] - [सर्वश्रेष्ठ हिन्दी कहानियाँ (कहानी-संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/sarvshreshth-hindi-kahaniyan/): कहानी साहित्य का वह अमूल्य अंग है, जिसमें समाज, संस्कृति, और मानवीय भावनाओं का समग्र चित्रण होता है। कहानियाँ न केवल जीवन की जटिलताओं को सरल रूप में प्रस्तुत करती हैं, बल्कि वे पाठकों को समाज और व्यक्ति के बीच के रिश्तों और संघर्षों से भी परिचित कराती हैं। इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत कहानी-संग्रह “सर्वश्रेष्ठ हिन्दी कहानियाँ” में जीवन के विभिन्न पहलुओं, भावनाओं, और परिस्थितियों को छूने वाली कहानियों का संकलन किया गया है। इंकलाब पब्लिकेशन ने अत्यंत सुंदरता से उन कहानियों का चयन किया है जो न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि पाठकों को सोचने […] - [लालची चींटा और अन्य कहानियाँ](https://inkalabpublication.com/product/lalchi-cheenta-aur-anya-kahaniyan/) - [जंगल में होली (बाल एकांकी-संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/jungle-men-holi-book/) - [सुहागन वेश्या (Suhagan Veshya) कहानी-संग्रह](https://inkalabpublication.com/product/suhagan-veshya/): “सुहागन वेश्या” कहानी संग्रह मेरे जीवन की पहली पुस्तक है, जो मेरे अनुभवों, समाज की जटिलताओं और मानवीय संबंधों के विविध रंगों को शब्दों में संजोने का प्रयास है। इस संग्रह में 14 कहानियाँ हैं, जो न केवल मानवीय भावनाओं की गहराई को उजागर करती हैं, बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं को भी उजागर करती हैं। हर कहानी एक अलग संघर्ष, एक अलग दर्द, और एक अलग मोड़ को दर्शाती है, जो पाठकों को सोचने और महसूस करने पर मजबूर कर देगी। “पहली मुलाकात” और “अनमोल मिलन” जैसी कहानियाँ हमें प्रेम की कोमल भावनाओं से रूबरू कराती हैं, जहाँ सच्चे […] - [प्यार में वेदनाएँ (साझा काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/pyar-me-vednayen/) - [हृदय स्वर (साझा काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/hriday-swar-sajha-kavya-sangrha/) - [अनाम संसार (रहस्यमयी कहानी-संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%ae%e0%a4%af%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8/) - [अवध में राम आए हैं (साझा काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%a7-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%86%e0%a4%8f-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%9d%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5/) - [दिव्या (साझा काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%9d%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9/) - [इक्कीसवीं सदीं की चुनिंदा हिंदी कहानियां](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%87%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6/) - [सुरम्य (काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9/) - [मेरी कविताएं सुनो ना ( काव्य संग्रह )](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a5%8b-%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d/) - [पुनम की कलम (काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9/) - [नारी समृद्धि](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%83%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%bf/) - [कंचन की आरजू ( उपन्यास )](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a5%82-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8/) - [शब्द मेरे मन के (काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%b6%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d/) - [राम-हनुमान युद्ध (नाटक)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a4%95/) - [पेंटिंग ज़िंदगी (काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82/) - [मेरी कविता (काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9/) - [माँ की बातें (काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9/) - [कशमकश -ए- जिन्दगी (ग़ज़ल संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%95%e0%a4%b6%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a4%b6-%e0%a4%8f-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97/) - [कागज खाता (काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%9c-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9/) - [निर्भया (साझा काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/nirbhya-sajha-kavya-sangrha/) - [Electromagnetic Field](https://inkalabpublication.com/product/electromagnetic-field/) - [धेनु महिमा (काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%81-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9/) - [बबलू की बिल्ली (बाल कहानी - संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%ac%e0%a4%ac%e0%a4%b2%e0%a5%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b8/): प्रस्तुत पुस्तक बाल कहानी संग्रह है| इन कहानियों में बच्चों को मनोरंजन के साथ शिक्षा भी दी गई है | - [नारी शक्ति की उड़ान (साझा काव्य संग्रह)](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%9d%e0%a4%be-%e0%a4%95/): नारी समाज का एक महत्वपूर्ण अंग है। नारी बिना समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती।भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। संस्कृत में एक श्लोक है- 'यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता:। अर्थात्, जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। सशक्तिकरण को लेकर विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं जिनका परिणाम यह है कि आज नारी मुखर होकर हर कार्य क्षेत्र में कंधे से कन्धा मिलाकर आगे बढ़ रही है।नारी शक्ति की उड़ान साँझा काव्य संग्रह में शामिल रचनाकारों ने अपनी लेखनी के प्रति समर्पण शीलता और रचनात्मकता के द्वारा नारी शक्ति को लेकर बहुत ही सुंदर कविताओं का संग्रह इसमें प्रस्तुत किया है।अंत में मैं अपने प्रस्तुत साँझा काव्य संकलन नारी शक्ति की उड़ान में सम्मिलित सभी प्रतिभाशाली रचनाकारों का हृदय तल की गहराइयों से हार्दिक अभिनंदन करते हुए उनका आभार व्यक्त करती हूं कि उन्होंने अपनी उत्कृष्ट काव्य रचनाओं को हमें प्रेषित कर हमारे काव्य संकलन को गौरव प्रदान किया है मुझे पूर्ण विश्वास है प्रस्तुत साँझा काव्य संकलन नारी शक्ति की उड़ान साहित्य के क्षेत्र में निश्चित रूप से अपनी एक नई पहचान बनाएगी और अंत में मैं एक पंक्ति में इस बात को कहना चाहूंगी कि सभी प्रतिभाशाली रचनाकारों से जो मधुर संबंध बने वह मुझे अवश्य ही नहीं सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं। - [कायनात काव्य संग्रह](https://inkalabpublication.com/product/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9/) - [KASHMIR KONNECTIVITY A BIOSKETCH: NOVEL](https://inkalabpublication.com/product/kashmir-konnectivity-a-biosketch-novel/) [comment]: # (Generated by Hostinger Tools Plugin)