यह संग्रह जीवन के विविध अनुभवों, आध्यात्मिक चिंतन, मानवीय मूल्यों, सामाजिक सरोकारों, राष्ट्रीय चेतना और सकारात्मक जीवन-दृष्टि को काव्यात्मक स्वर प्रदान करता है। इस कृति का शीर्षक अपने आप में अत्यंत अर्थपूर्ण है। ‘साधना’ जहाँ आत्मानुशासन, एकाग्रता, आत्मचिंतन और निरंतर प्रयास का प्रतीक है, वहीं ‘प्रसून’ उन भावनाओं और विचारों के पुष्प हैं, जो साधना की उर्वर भूमि पर खिलकर जीवन को सुगंधित करते हैं। इस प्रकार यह काव्य-संग्रह केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने की एक आंतरिक यात्रा भी है।





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