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आज का साहित्यिक संसार तेजी से बदल रहा है। पहले लेखक केवल पुस्तकों के माध्यम से पहचाने जाते थे, लेकिन अब डिजिटल दुनिया ने साहित्य की दिशा ही बदल दी है। आज एक लेखक की पहचान केवल उसकी पुस्तक से नहीं, बल्कि उसकी डिजिटल उपस्थिति से भी बनती है। डिजिटल ब्रांडिंग क्या है? जब किसी
हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उभरते लेखकों के लिए क्यों जरूरी है डिजिटल ब्रांडिंग? Read More »
Why publish your book with inkalabPublications?किसी भी लेखक के लिए उसकी पुस्तक केवल कागज़ के पन्नों का संग्रह नहीं होती, बल्कि उसकी भावनाओं, संघर्षों और अनुभवों की अभिव्यक्ति होती है। इसलिए पुस्तक प्रकाशित कराने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। पांडुलिपि की गुणवत्ता रचना को प्रकाशित करने से पहले भाषा, व्याकरण और प्रस्तुति पर विशेष ध्यान
हिंदी पुस्तक प्रकाशित कराने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? Read More »
Blogआज का समय डिजिटल युग का समय है। केवल अच्छी रचना लिखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सही ढंग से प्रस्तुत करना भी आवश्यक है। यदि आपकी कविता केवल डायरी तक सीमित रह जाए तो उसकी पहुँच सीमित हो जाती है, लेकिन यदि वही कविता वीडियो, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत हो
अपनी कविता और ग़ज़ल को डिजिटल दुनिया में लोकप्रिय कैसे बनाएँ? Read More »
Why publish your book with inkalabPublications?हर लेखक चाहता है कि उसकी रचनाएँ लोगों तक पहुँचें, लेकिन हर किसी के लिए शुरुआत में व्यक्तिगत पुस्तक प्रकाशित कराना आसान नहीं होता। ऐसे में साझा काव्य संग्रह नए लेखकों के लिए एक ऐसा मंच बनकर उभरा है जिसने हजारों प्रतिभाओं को पहचान दिलाई है। आज हिंदी साहित्य जगत में साझा काव्य संग्रहों की
नए लेखकों के लिए साझा काव्य संग्रह क्यों है सुनहरा अवसर? Read More »
Why publish your book with inkalabPublications?साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं होता, बल्कि भावनाओं, अनुभवों और समाज की आत्मा का दर्पण होता है। हर लेखक अपने भीतर एक ऐसी दुनिया लेकर चलता है जिसे वह अपनी रचनाओं के माध्यम से पाठकों तक पहुँचाना चाहता है। लेकिन एक लेखक की सबसे बड़ी चुनौती केवल लिखना नहीं, बल्कि अपनी रचना को सही
हमारी स्वतंत्रता आज हम मनाये संग संग आजादी की वर्षगांठ का जश्न सवतंत्रता सेनानियों ने खाई थी कसम नहीं रहेंगे बेड़ियों में हम, चाहे निकले प्राण एकदम | स्वपन देखा था आजादी का सबने मिल चाहे हो आजाद, गाँधी, जवाहर , शास्त्री, भगत सिंह हो सुभाष या फिर राम प्रशाद बिस्मिल | कर दिया अपना
क्रांतिसूर्य धरती आबा महामानव भगवान बिरसा मुंडा बीते, 15 नवंबर को, आजादी के महानायक और भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती थी। इस अवसर पर पूरा देश श्रद्धांजलि से सराबोर दिखाई दिया। अखबारों में उनके जीवनी पर अनेकों लेख प्रकाशित हुए और सोशल मीडिया पर लोगों ने श्रद्धा भरे संदेश साझा किए। ऐसा लगा मानो
महामानव भगवान बिरसा मुंडा Read More »
आलेख*डॉo ब्रजेश बर्णवाल का साहित्यिक परिचय* —————————————————————- इनका नाम डॉo ब्रजेश बर्णवाल है। इनका जन्म 10 जून 1993 को हुआ था। ये अशोक बर्णवाल एवं यशोदा देवी के संतान हैं। ये झारखण्ड राज्य के गिरिडीह में स्थित सिंघो गांव के निवासी हैं। लगभग पांच वर्ष की अवस्था में ही इनके पिताजी का देहावसान हो गया।बचपन
साहित्य का महत्त्व और उद्देश्य Read More »
आलेखसर्व श्री रेगरान पंचायत अजमेर एवं पट्टी पंचायत संस्था 210 गांव अजमेर द्वारा प्रति वर्ष आयोजित होने वाला वार्षिक प्रतिभा सम्मान समारोह इस वर्ष 12 अक्टूबर 2025 रविवार को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सभागार अजमेर में बड़े ही उत्साह और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर शिक्षा, प्रशासन, खेलकूद, संस्कृति एवं समाज सेवा जैसे
प्रतिभा सम्मान समारोह में “सेवा भक्ति के प्रतीक” पुस्तक का भव्य विमोचन Read More »
साहित्य समाचारइंकलाब पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित साझा काव्य संग्रह “मौन संवाद” के संपादक एवं सभी रचनाकारों को प्रतिष्ठित “निराला सारस्वत सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा में एक गौरवपूर्ण अवसर के रूप में दर्ज हुआ। इस अवसर पर “मौन संवाद” के सभी रचनाकार — निरंजना डांगे (संपादक), देवेन्द्र थापक,
‘मौन संवाद’ काव्य संग्रह के रचनाकारों को ‘निराला सारस्वत सम्मान’ से नवाज़ा गया Read More »
साहित्य समाचारअजमेर, राजस्थान के प्रसिद्ध साहित्यकार और “सैनिक कवि” के नाम से विख्यात गणपत लाल उदय को नेपाल की प्रतिष्ठित संस्था “शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन, नेपाल” द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस कविता प्रतियोगिता में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए “अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक रत्न” मानद उपाधि सम्मान से अलंकृत किया गया है। लुंबिनी/नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी
अजमेर के गणपत लाल उदय को मिला “अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक रत्न” मानद उपाधि सम्मान Read More »
साहित्य समाचारतू ही बालक हो , तू ही राम हो , तू ही मर्यादा हो , तू ही राम हो , शिशु रूप में तू ही हो धर्मात्मा , विष्णु रूप में तू ही रखवाला , प्रभु आपकी लीला तो अपरंपार। कोमल – सी चरणों में कृपालु हो , न्याय की तलवार भी तू ही हो
नमन करो उस बापू को , जिन्होंने अपना देश आजाद कराया , आखिर हमें वो आजादी मिली नहीं , नव जीवन का नई आजादी हो दोबारा , आजाद हो अपना देश दोबारा । अपना देश आजाद होने का सपना , पुरा हुआ नहीं , हम हिन्दुस्तान के नागरिकों को , यदि आजाद हैं हम हिन्दुस्तानी
आजाद हो अपना देश दोबारा Read More »
कविताप्रेम की घड़ी में मिलन जो हुआ , हर क्षण हर पल प्रेम जो हुआ , मंदिर मस्जिद में होती है मिलन , हाट – बाजार में होती है मिलन , प्रेम की मिलन में होती है आनंद । प्रेम की घड़ी में मिलन जो हुआ , प्रेम की रस में आनंद हीं आनंद ,
प्रेम की घड़ी में मिलन जो हुआ Read More »
कवितापुस्तक: कितनी बार कहा साथी – पातियाँ प्यार की लेखक – हरेंद्र “हमदम” दिलदारनगरी प्रकाशक – इंकलाब पब्लिकेशन मुंबई , महाराष्ट्र मूल्य : 499 रुपए (हार्डकवर) हरेंद्र “हमदम” दिलदारनगरी का काव्य-संग्रह कितनी बार कहा साथी (पातियाँ प्यार की) प्रेम, संवेदनाओं और जीवन-दर्शन का अनूठा संगम है। यह संग्रह केवल भावनाओं का संकलन भर नहीं
*डॉo ब्रजेश बर्णवाल का साहित्यिक परिचय* —————————————————————- इनका नाम डॉo ब्रजेश बर्णवाल है। इनका जन्म 10 जून 1993 को हुआ था। ये अशोक बर्णवाल एवं यशोदा देवी के संतान हैं। ये झारखण्ड राज्य के गिरिडीह में स्थित सिंघो गांव के निवासी हैं। लगभग पांच वर्ष की अवस्था में ही इनके पिताजी का देहावसान हो गया।बचपन
१५ अगस्त और श्री कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ दिवस पर ‘ काव्यसृजन ’ व ‘ नवांकुर ’ परिवार के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया। यह भव्य आयोजन अंधेरी, साकीनाका में श्री राम जानकी मन्दिर के प्रांगण मे मनाया गया। काव्य गोष्ठी के साथ काव्य प्रतियोगिता का भी आयोजन रखा
लाख तानों से तेरे आत्मविश्वास को डिगाया जाएगा तुझे तेरी ही क्षमताओं पर शंका करने को उकसाया जाएगा तेरे बस का नहीं है ये हर बार तुझे समझाया जाएगा तेरे मूल्य को तेरी ही नजरों में गिराया जाएगा उस वक्त धैर्य से सब सुन नजरअंदाज करना तुम बस खुद पर ही विश्वास करना क्यूंकि मेहनत
लघुकथा:_खोपड़ियों💀 से वार्तालाप🙀 कल्पनाओं की दुनिया में सत्य की एक झलक अचानक से तेज हसीं की और कोलाहल की आवाज कानों में पड़ी थोड़ी डरावनी सी आहट के साथ इसे सुन कर मैं कांप गई क्या था कुछ समझ नहीं आया कि तभी अचानक असंख्य मानव खोपड़ियों ने मुझे घेर लिया और घूमने लगी मेरे
लघुकथा :_खोपड़ियों से वार्तालाप कल्पनाओं में सत्य की एक झलक Read More »
लघुकथामाँ 🙏 तू माता मै लाल तेरी तू अस्तित्व मै परछाई तेरी गर्भ में सीखी मैने गाथा सीखी रामायण और कृष्ण की बाल लीला नमन करु मै माँ तुम्हे तुम ही हो पहली गुरु पिताजी 🙏 तुम मेरी छत ,तुम ही हो ढाल मेरी तुम मुझमें बसा पराक्रम ,तुम ही हो दृढ़ निश्चय मेरा तुम
आइये , सुनते है मनस्तगिति एक स्त्री की , अपने स्वर में कहती रची हुई एक गाथा की , अपने संघर्ष, अपनी अनुभूति और शक्ति को पाने की, यह यात्रा खुद सुनाती है — शांत, दृढ़, और आत्मस्वीकृत स्वभाव में लक्ष्य पास जाने की । यह कविता उस स्त्री की आवाज़ है — जिसने रास्तों
मैं झुकी थी – इसलिए उठ सकी Read More »
कविता_तुम मत बदलना मेरे लिए_ कुछ- कुछ तुम वैसी ही हो जैसे ढलती शाम में आकाश में उमड़ते बादल कुछ स्याह कुछ रक्तिमा कुछ कुछ नीली पीली धूप लिए. कुछ कुछ तुम वैसी ही हो जैसे मक्खन कुछ घी कुछ पिघला मोम बस अब तक नहीं जान पाया एक क्राइटेरिया में तुमको फिट करना. जब
ग़ज़ल.. किसी से तो शिकायत कर रहा है वो मग़र खुद से मुहब्बत कर रहा है वो नहीं उसको गिला शिकवा किसी से अब ख़ुदा की अब इबादत कर रहा है वो दुआयें चल रही हैं साथ जब तक यह ज़माने से बगावत कर रहा है वो सिवा उसके नहीं आदत हमें कोई ख़ुदा बन कर इनायत कर रहा है वो खमोशी रास आती थी जिसे ‘राही’ सभी से अब रफ़ाक़त कर रहा है वो ~ रसाल सिंह ‘राही’
किसी से तो शिकायत कर रहा है वो Read More »
ग़ज़ललघुकथा सच्ची सुंदरता वो झुर्रियों भरी काया आज उदास बैठी थी कंपकपाते हाथों के साथ खुद को दर्पण में देख व्याकुल हो रही थी दर्पण यथार्थ को उजागर कर रहा था और चिढ़ाते हुए काया से बोला :_बोल मेरी सुंदरी आज नहीं इठलाएगी,आज नहीं खुद को निहार निहार कर घमंड के सागर में डुबकी लगाएगी,आज
🖋️ तख्ती से टैबलेट तक तख्ती से टैबलेट तक की ये कहानी, कभी हँसी, कभी अश्रु की निशानी। कक्षा की धूल से स्मार्ट स्क्रीन तक, शिक्षक की बदलती पहचान की रवानी। कभी चौक से उड़ता था ज्ञान, अब क्लिक पे खुलते हैं ज्ञान-विधान। पर बच्चों की आँखों से दूर हुआ मन, संस्कार कहाँ हैं —
तख्ती से टैबलेट तक Read More »
कवितादुख का व्यापार सोशल मीडिया का हर तरफ इस तरह प्रभाव छा रहा की इंसान अपना दुख भी बेचता नजर आ रहा कभी खुद को रोते बता रहे कभी मां बाप के आंसू दिखा रहे छुपाया करते थे जिन चीज़ों को उनको खुलेआम जता रहे लाइक्स….व्यूज बढाने के लिए कुछ भी कंटेंट बना रहे अपने
शिक्षा’ जिसके माध्यम से मनुष्य यह जान पाता है कि जीवन में उसके होने का महत्व क्या है।जन्म का उद्देश्य क्या है।उसके स्वयं की,परिवार,समाज,देश और विश्व के प्रति उसकी जिम्मेदारियां क्या है?’शिक्षा’ जहां मनुष्य को आत्म-विकास से लबरेज करती है।वहीं स्वालंबन एवं श्रेष्ठ जीवन की ओर प्रेरित भी करती है।’शिक्षा’ हर मनुष्य को चरित्र संपन्न,विचारवान
आलेख बालिका शिक्षा-पी.यादव ‘ओज’ Read More »
आलेखएक प्रसिद्ध राजा था । जिसका नाम रामपाल था । अपने नाम की ही तरह प्रजा की सेवा हीं उनका धर्म था । उनकी प्रजा भी उन्हें राजा रामपाल की तरह हीं पूजती थी । राजा रामपाल सभी की निष्काम भाव से सहायता करते थे । फिर चाहे वो उनके राज्य की प्रजा हो या
ग़ज़ल… दिलों से आग नफ़रत की बुझाओ तुम मग़र इन फ़ासलों को भी मिटाओ तुम नहीं अल्फ़ाज़ कोई मिल रहा मुझको लिखूं मैं क्या यहां कुछ तो बताओ तुम मुहब्बत इश्क़ की ना बात करना तुम कभी जब दास्तां दिल की सुनाओ तुम मुसाफ़िर हैं सभी अनजान राहों के किसी से भी नहीं यह दिल
दिलों से आग नफ़रत की बुझाओ तुम Read More »
ग़ज़लग़र टूटा दिल, तन्हाई संग होता यहाँ.. ग़र टूटता जब तारा आसमां में, उसे देख मन्नत मांगते हैं यहाँ सभी, न जानें टूटे हुए दिल को देख, है क्यूं हसीं यहां उड़ाते यारों सभी! टूटे दिल की चीखें हैं कौन सुने, हर चेहरा मुस्कुराता है दिखता यहाँ! अंदर की दरारें हैं दिखती नहीं, बस ज़ख्मों पे नमक
ग़र टूटा दिल, तन्हाई संग होता यहाँ.. Read More »
कविताअच्छा हुआ तुमने मुझसे, अब किनारा कर लिया, था अपना कभी बनाया, है अब बेगाना कर दिया। टूटे अरमानों की चुभन सीने में बसती है अब मेरे, हर साँस यादों की परछाई से, था ऐसा भर दिया! अच्छा हुआ तुमने मुझसे, अब किनारा कर लिया, जो ख्वाब हमनें साथ बुने थे रेशम से कोमल
अच्छा हुआ तुमने मुझसे, अब किनारा कर लिया…. Read More »
कवितावरना इतनी अच्छी सी किस्मत मेरी कहां हो… तेरे झील सी आँखों में मेरी हो दुनियां समाया, माथे पर लगा सिंदूर मेरे प्यार की निशानी हो! तेरी मुस्कान जैसे सुबह की पहली हो किरण, हर अंधेरे को चीरती, रौशनी का वो दर्पण हो,! तेरी आँखें लगे जैसे समंदर की सी हो गहराई, हर राज़ छुपाए
वरना इतनी अच्छी सी किस्मत मेरी कहां हो. Read More »
कविता