सोचा ना था
सोचा ना था सोचा ना था कि तुम ऐसे बदल जाओगे फोन करने पर आप कौन? कहकर आसानी से भूल जाओगे संभाले रखा हूॅ, मैं आज भी तुम्हारे साथ जुड़े हर यादों को बिते हर लम्हा और वादों को बिल्कुल धरोहर की तरह अब भी सब, वैसा का वैसा ही पर सोचा ना था कि […]
सोचा ना था सोचा ना था कि तुम ऐसे बदल जाओगे फोन करने पर आप कौन? कहकर आसानी से भूल जाओगे संभाले रखा हूॅ, मैं आज भी तुम्हारे साथ जुड़े हर यादों को बिते हर लम्हा और वादों को बिल्कुल धरोहर की तरह अब भी सब, वैसा का वैसा ही पर सोचा ना था कि […]
पापा की शेरनी खुशनसीबी है तरु की जब तक रही पापा आपके साये तले पापा की परी नहीं शेरनी बनकर रही है, आपकी उंगली को पकड़कर कदम दर कदम बिना रुके चली है देखा पापा आपको खुशियों की खातिर अपनी खुशियों की आहूति पल पल आपको देते, ऐसे ही नहीं आदर्श अपना मानकर आपसे प्रेरित
१- पिता को समर्पित हे पिता ! तुमको नमन, तुमको नमन, तुमको नमन हे पिता ! तुमको नमन, तुमको नमन, तुमको नमन तुमसे है यह धरती गगन तुमसे है यह हंसता चमन तुमसे है यह मां की हंसी तुमसे है यह मेरा जन्म तुम सत्व में अस्तित्व में, निरपेक्ष में सापेक्ष में, तुम पुत्र
” सम्राट अशोक जन्मोत्सव पर विशेष” नमो बुद्धाय साथियों , इतिहास की विभिन्न धाराओं को समेटे हर एक पंक्ति आपसे बहुत कुछ कहना चाहती है । अतीत की झलक प्रस्तुत करती ये मेरी कविता अग्रिम आभार सहित आप सब के बीच प्रस्तुत है “जो बीत गई वो अमिट इतिहास हुई ” जो बीत गई वो
जो बीत गई वो अमिट इतिहास हुई।। Read More »
कविताजग में मिली सफलता तुझे , कुछ अच्छा कर दिखाने में , इस संसार में आये हो तू तो , कुछ अच्छा करो शीघ्र करो , जग में मिली है सफलता तुझे । आये हो इस जग में जब तू , जन्म हुआ इस दुनिया में , श्रम करो परिश्रम करो तू , जग में
जग में मिली है सफलता तुझे Read More »
कविताहे भारत के होनहार वीर – सपूतों हे भारत के होनहार वीर – सपूतों , उठो फिर से दोबारा वीर – सपूतों , मातृभूमि पुकारा है आपको सदा , रणभूमि खाली है मेरे वीर- सपूतों , युद्ध की तैयारी करो वीर – सपूतों , हे भारत के होनहार वीर – सपूतों । रणभूमि में दुश्मनों
हे भारत के होनहार वीर – सपूतों Read More »
कविताहे भारत के होनहार वीर – सपूतों हे भारत के होनहार वीर – सपूतों , उठो फिर से दोबारा वीर – सपूतों , मातृभूमि पुकारा है आपको सदा , रणभूमि खाली है मेरे वीर- सपूतों , युद्ध की तैयारी करो वीर – सपूतों , हे भारत के होनहार वीर – सपूतों । रणभूमि में दुश्मनों
जय प्रकाश वर्मा ऊर्फ कलामजी की 2 कविताएं Read More »
कविता*मैं शिव हूँ* मैं हूँ सनातन सर्व हित पीता हलाहल| मैं अपमान सहता न करता कोलाहल|| मैं अपनों के हित जीता रहता हूँ मस्त मगन| मैं पूर्ण हूँ परिपूर्ण हूँ न छलकता हूँ छलाछल|| मैं शिव हूँ सत्य हूँ सबसे सरल भी हूँ| मैं भोला हूँ सबके हित पीता गरल भी हूँ|| मैं सबका हूँ
प्रेम में बंध कर ~~~ कौन हो आप क्या लगते हो आप मेरे मुझे आपसे इतना प्रेम क्यों है कुछ नहीं जानता मैं मग़र अब आप की ही तरह मुझे इन पहाड़ों से प्रेम है मुझे झील झरनों से प्रेम है मुझे क़िताबों से प्रेम है और मैं ये भी जानता हूँ कि प्रेम एक
रसाल सिंह ‘राही’ की प्रेम कविताएँ Read More »
कविता