“मानव सत्य”
मन आहात होता है
जब आम जन पर त्रास होता है |
आम जन आम जन के साथ होता है
न उसका कोई साथ देता है ||
समय था समय है और समय आएगा
कौन कब तक किसके साथ रहता है |
सरकारें थीं सरकारें हैं सरकार आएंगी
पर कब किसका उद्धार होता है ||
मनुष्य का तो एक ही जीवन है
कब किसके साथ होता है कब बर्बाद होता है |
सब पाते हैं इसी जीवन में
कुछ खो कर पाने की चाह रखते हैं
कुछ पाने की चाह में कीमत चुकाते हैं ||
कैसे जीवन की चाह रखते हैं कैसा जीवन चाहते हैं
तसल्ली भरी शाम और चैन की नींद चाहते हैं |
सुकून, शांति, प्रेम सबका साथ
इसी जीवन में चाहते हैं ||
युद्ध, लड़ाई, मार-काट
है, नहीं मानव का स्वभाव |
गुणगान करे प्रभु का हर पल
यही है मानव का मूलस्वभाव
यही है इस जीवन का नेक विचार ||
(मोनिका नौटियाल)
उत्तराखण्ड


