मीनू अग्रवाल की कहानी -पुरानी कुर्सी

अपने दोस्तों के साथ अवश्य साझा करें।

बाबूराव अब 65 साल के हो गए थे। आँखों से कम दिखाई देता था, हाथ कंपकंपाते थे, और पैरों ने भी जवाब दे दिया था। घुटनों के दर्द के कारण बाबूराव को ज्यादा चलने-फिरने में परेशानी होती थी। परंतु आज भी बाबूराव जिंदादिली की मिसाल थे। अपनी ठहाकेदार हँसी से वे आज भी लोगों को हँसा देते थे। उनकी पत्नी को गुजरे पाँच साल हो चुके थे। बाबूराव अपने बेटे और बहू के साथ रहते थे। बाबूराव का पूरा दिन अपनी कुर्सी पर बैठकर कथा-साहित्य पढ़ने में व्यतीत होता था। कोई साथ दे या न दे, उनकी कुर्सी ने उनका साथ हर पल निभाया था। जब कभी उनका अपने बेटे या बहू से झगड़ा होता, तो वे अपनी प्यारी कुर्सी पर बैठकर आँखें बंद कर लेते। कुछ पल इसी स्थिति में रहने के बाद उन्हें हल्का महसूस होता।

कभी-कभी बाबूराव अपनी कुर्सी से बातें भी करते थे। यही कुर्सी थी, जो हर पल बाबूराव के सुख-दुःख की गवाह बनी। एक दिन बाबूराव के बेटे ने कहा, “पिताजी, हमने सोचा है कि यह घर पुराना हो गया है। आजकल तो फ्लैटों में रहने का चलन है। क्यों न हम भी फ्लैट में रहने चलें? मैंने तो एक फ्लैट देख भी लिया है—बहुत सुंदर और बड़ा है।” फिर क्या था, शीघ्र ही सारा सामान एक बड़ी ट्रक में जाने लगा। सारा सामान ट्रक पर लद चुका था, बस एक चीज़ बची थी—बाबूराव की पुरानी कुर्सी। बाबूराव के बेटे ने कहा, “पिताजी, इस कुर्सी को यहीं छोड़ देते हैं। वैसे भी यह बहुत पुरानी हो गई है।” इस पर बाबूराव ने कहा, “पुरानी है तो क्या हुआ? यह मेरे सुख-दुःख की साक्षी है। यही एकमात्र यादगार है मेरे लिए। तुम भी तो इसी कुर्सी पर बैठकर इतना पढ़-लिख पाए कि आज एक अफसर बन गए हो।”
“पर पिताजी, यह पुरानी कुर्सी हमारे नए घर में क्या अच्छी लगेगी? आप भी बच्चों की तरह ज़िद करने लगते हैं,” बेटे ने जवाब दिया। काफी देर बहस के बाद, अंततः बाबूराव ने उदास होते हुए कहा, “ठीक है बेटा, इस कुर्सी को यहीं छोड़ दो। बहुत पुरानी हो गई है।” इतना कहकर बाबूराव की आँखों में आँसू आ गए।
समय बीतता चला गया। कुछ सालों बाद पता चला कि बाबूराव अब वृद्धाश्रम में रहते हैं। उनके बेटे ने उन्हें भी कुर्सी की भाँति पुराना समझकर छोड़ दिया । आज बाबूराव और उनकी कुर्सी की स्थिति एक समान थी—असहाय और बेबस।

पता – D63/31 A-6, Panchsheel colony,
Mahmoorganj ,Varanasi Uttar Pradesh – 221010

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shopping Cart