लहू खौल रहा सबका, अब युद्ध आर-पार का होगा….
हो ऐसी ललकार हर तरफ़ से, अब बदला लेना होगा, शस्त्र उठा हाथों में यारों, दुश्मन को ललकारना होगा! सरहद की माटी पुकारे, कब तक जुल्म सहना होगा, उठे दिलों में शौर्य-ज्योति,इस अंधेरे को हटाना होगा! हैं तलवारें भी कहने लगी,हम पर धार नई कब होगी, तैयार हैं बंदूकें सारी,अब हिसाब बराबर करनी होगी! […]
लहू खौल रहा सबका, अब युद्ध आर-पार का होगा…. Read More »
कविता



























